विहिप सम्मेलन : राम मंदिर, हिंदू आतंकवाद अहम मुद्दे (लीड-1)
विहिप के अंतर्राष्ट्रीय न्यासियों और शासी परिषद के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में महासचिव प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि अयोध्या में जहां भगवान राम का जन्म हुआ था, वहां 35 फुट के भूखंड में मंदिर का निर्माण संभव नहीं है। हम इसके लिए अयोध्या में पूरे 67 एकड़ जमीन चाहते हैं।
तोगड़िया ने कहा, "हनुमान शक्ति जागरण प्रक्रिया कब शुरू करनी है इसके बारे में हम विचार करेंगे। यह आंदोलन रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण की दिशा में अंतिम लोकतांत्रिक संघर्ष होगा। इस आंदोलन में वर्ष 1990 के मध्य जैसा उत्साह दिखेगा।"
उन्होंने कहा कि परिषद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन की योजना बना रही है। सांसदों से आग्रह किया जाएगा कि वे इसके लिए संसद में विधेयक पारित करें।
तोगड़िया ने कहा, "विहिप ऐसी पार्टी नहीं है जो मामले को लेकर अदालत में जाएगी। हमें 35 फुट के भूखंड में मंदिर के निर्माण से संतुष्टि नहीं मिलेगी। हम अयोध्या में पूरे 67 एकड़ भूमि में मंदिर का निर्माण चाहते हैं।"
उन्होंने कहा, "यह आस्था का प्रश्न है। किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह भारत में हिंदुओं की आस्था पर सवाल उठाए।" तोगड़िया ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह हलफनामे में किए इस वादे को पूरा करे। जब अदालत ने रामजन्मभूमि मंदिर के पक्ष में फैसला दिया है, तब मंदिर निर्माण के लिए समूचा परिसर सौंप दिया जाना चाहिए।
इससे पहले विहिप के अध्यक्ष अशोक सिंघल ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस आतंकवादी बताकर हिंदू संतों एवं संघ परिवार के अन्य संगठनों का दुष्प्रचार कर रही है।
सिंघल ने कहा कि केंद्र सरकार 'कैथोलिक' धर्मावलम्बी के निर्देशों पर चल रही है और हिंदुओं को हाशिए पर धकेल रही है।
विहिप ने यह भी कहा कि चीन को ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाने से रोकने के लिए वह वैश्विक रणनीति बनाने जा रही है।
तोगड़िया ने कहा, "ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाना या उनकी दिशा को मोड़ना एक गंभीर मुद्दा है। तीन दिवसीय सम्मेलन में हम इस मुद्दे पर भी चर्चा करेंगे और यह सुनिश्चित करने के लिए बांध नदी के पार न आए, एक वैश्विक रणनीति बनाएंगे।"
उल्लेखनीय है कि विहिप के सम्मेलन में भाग लेने के लिए लगभग 250 शीर्ष पदाधिकारी गोवा पहुंचे हैं। वे अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तिथि एवं रूपरेखा तय करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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