स्पेक्ट्रम घाटा अनुमान दोषपूर्ण : सिब्बल (राउंडअप)

नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को आधिकारिक लेखा परीक्षकों द्वारा 2008 में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से सरकार को होने वाले नुकसान के मूल्यांकन के लिए अपनाए गए तरीकों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें गंभीर खामी है। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने आवंटन से सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये (40 अरब डॉलर) का नुकसान बताया है।

सिब्बल ने संसद के शीतकालीन सत्र को बाधित करने के लिए विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि वे आम आदमी को बेवकूफ बना रहे हैं, क्योंकि उन्हीं लोगों ने अपने शासन काल में स्पेक्ट्रम आवंटन की नीति बनाई थी।

इसी के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने मंत्रिमंडल के दो वरिष्ठ सहयोगियों की सलाह पर काम किया है और दोनों सहयोगियों ने उन्हीं नीति के तहत सलाह दिया, जिसे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के दिनों में बनाया गया था।

उन्होंने कहा कि हालांकि वे उस संवैधानिक संस्था द्वारा निभाई गई जिम्मेदारी का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि जिम्मेदारी निभाने में गंभीर खामी बरती गई है, जिसके कारण विपक्ष को जनता को बेवकूफ बनाने का अवसर मिल गया है।

सिब्बल नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की उस रिपोर्ट की ओर इशारा कर रहे थे, जिसमें लेखा परीक्षक ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में सरकार को 12.8 से 40 अरब डॉलर का नुकसान बताया था।

उन्होंने कहा कि 1999 से जो नीति जारी है उसी के कारण मोबाइल फोन सेवा की दर 17 रुपये प्रति मिनट से घटकर 2004 में तीन रुपये प्रति मिनट हो गई और अभी यह 30 पैसे प्रति प्रति मिनट हो गई है।

यह साफ तौर पर दिखाई पड़ने वाला फायदा है। सेवा दर घटने से उपभोक्ताओं को सलाना 1,50,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। उन्होंने एक-एक बिंदु स्पष्ट करते हुए कहा कि नुकसान शून्य है, यानी कोई नुकसान नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने अपने साथ अन्याय किया है और विपक्ष आम आदमी के साथ अन्याय कर रही है।

खुद कानून के जानकार रहे सिब्बल ने कहा कि यदि किसी के गलत होने या अपराध करने का प्रमाण मिलता है, तो कानून उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा। हम किसी को बचाना नहीं चाहते हैं।

उल्लेखनीय है कि बाजार मूल्य से कम कीमत पर 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से सरकार को होने वाले नुकसान के आरोप में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा को पद छोड़ना पड़ा। इस मामले की जांच संसदीय समिति से कराने के विपक्ष की मांग पर संसद का पूरा शीतकालीन सत्र बिना कार्यवाही समाप्त हो गया।

सिब्बल ने कहा कि 1998 से 2004 तक सत्ता में रहे राजग के कार्यकाल में तैयार की गई दसवीं पंचवर्षीय योजना के कागजातों के मुताबिक दूरसंचार क्षेत्र का विकास सरकार के लिए राजस्व अर्जित करने से अधिक महत्वपूर्ण था।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने उन्हीं की नीति का पालन किया है। और वे अब कह रहे हैं कि सरकारी राजस्व अधिक महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से जुटाए गए राजस्व की तुलना कर 2जी स्पेक्ट्रम की भी नीलामी की बात सोचना उचित नहीं है।

उन्होंने अपनी बात समझाने के लिए सड़क का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार राजमार्गो पर टोल वसूलती है, लेकिन गांवों की सड़कों पर टोल नहीं वसूलती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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