खाद्य महंगाई 18.32 फीसदी, थोक-खुदरा कीमत का फासला प्रमुख कारण (राउंडअप)
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़े के मुताबिक 25 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य महंगाई दर 14.44 फीसदी से बढ़कर 18.32 फीसदी हो गई।
निरंतर बढ़ रही महंगाई पर प्रतिक्रिया करते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने थोक और खुदरा भाव के अंतर को महंगाई का प्रमुख जिम्मेदार बताया और राज्य सरकारों से खाद्य आपूर्ति श्रंखला प्रबंधन पर ध्यान देकर आपूर्ति की बाधाओं को दूर करने का सुझाव दिया।
इसी बीच पाकिस्तान की ओर से भारत को अटारी-वाघा सीमा से प्याज की आपूर्ति रोक दिए जाने से प्याज की कीमत के फिर से बढ़ने की संभावना के बीच वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने पाकिस्तान से फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
शर्मा ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि कम-से-कम पहले से दिए गए ऑर्डर की आपूर्ति कर दें।
महंगाई के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार की तीव्र आलोचना की। भाजपा प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि सरकार ने लोगों के मुंह से निवाला छीन लिया है। प्याज से लेकर हर खाने की वस्तु महंगी हो चुकी है।
सेवानिवृत्त शिक्षिका नीलम उपाध्याय ने कहा कि यदि वे 70 रुपये प्याज पर और 50 रुपये टमाटर पर खर्च करेंगी तो बाकी चीजों के लिए पैसा कहां बचेगा। यहां तक कि दूध और अंडे भी महंगे हो गए हैं।
आलोच्य अवधि में प्रमुख खाद्य पदार्थों की कीमतों में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले हुआ उतार-चढ़ाव निम्न है:
मोटे अनाज: (-) 0.53 प्रतिशत
चावल: 1.03 प्रतिशत
गेहूं: (-) 5.40 प्रतिशत
दालें: (-) 10.54 प्रतिशत
सब्जियां: 58.85 प्रतिशत
आलू: -15.45 प्रतिशत
प्याज: 82.47 प्रतिशत
फल: 19.99 प्रतिशत
दूध: 19.59 प्रतिशत
अंडा, मांस, मछली: 20.83 प्रतिशत
महंगाई से निपटने के उपाय के तौर पर मुखर्जी की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह ने दाल के निर्यात पर अनिश्चित काल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है और सरकारी उचित दर दुकानों से बेचने के लिए अतिरिक्त 50 लाख टन गेहूं और चावल जारी करने का फैसला किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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