तेलंगाना समर्थकों ने रिपोर्ट को ठुकराया

तेलंगाना समर्थकों ने रिपोर्ट को ठुकराया
उमर फ़ारूक़बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद

आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र में इससे पहले भी इस मुद्दे पर तनाव रह चुका है (फ़ाइल फ़ोटो)दक्षिणी राज्य आंध्रप्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर गठित श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है.केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने इस रिपोर्ट को दिल्ली में आंध्रप्रदेश के सांसदों की एक सर्वदलीय बैठक के सामने रखते हुए इसमें दिए गए सुझावों पर चर्चा की.

समिति ने इस मामले में सरकार के सामने लगभग सभी संभव रास्ते रखे हैं और सभी उपायों से संबंधित फ़ायदों को नुकसान का भी ज़िक्र किया है.प्रारंभिक सूचना के अनुसार समिति ने सरकार को पांच सुझाव दिए हैं.पहला सुझाव है कि आंध्रप्रदेश को ज्यों का त्यों एक संघटित राज्य रखा जाए.

दूसरा सुझाव है कि तेलंगाना और आंध्र को अलग-अलग राज्य बनाकर 1956 से पहले वाली स्थिति बहाल की जाए.तीसरे सुझाव के तहत हैदराबाद और तीन ज़िलों रंगा रेड्डी, महबूबनगर और नलगोंडा को मिलाकर एक केंद्र प्रशासित राज्य बनाया जाएचौथा सुझाव है कि तेलंगाना और रायला सीमा क्षेत्रों को मिलाकर एक अलग राज्य बना दिया जाए.पांचवे सुझाव के तहत तेलंगाना की बुनयादी समस्याओं को हल करने के लिए तीन समितियां गठित किए जाने का रास्ता सुझाया गया है.ये समितियां सरकारी नौकरियों, नदियों के जल और दूसरे विवादित विषयों के मुद्दे पर तेलंगाना क्षेत्र के साथ न्याय को आश्वासित करेंगी.

हालांकि कई तेलंगाना समर्थक संगठनों ने शुरुआती दौर में ही श्रीकृष्ण समिति के इन सुझावों को रद्द कर दिया है.तेलंगाना राष्ट्र समिति के महासचिव तारका रामराव ने कहा है की तेलंगाना के लोग उस समय तक आंदोलन चलाएंगे जब तक केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य की स्थापना के लिए संसद में बिल पेश नहीं कर देती.उन्होंने कहा, ''श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट से हमारा कोई लेनादेना नहीं है और अब हमारा सारा ध्यान आंदोलन पर केन्द्रित रहेगा.''

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर कोदंडा राम का कहना है, ''अब केवल आंदोलन का रास्ता बचा हुआ है लेकिन यह आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा.''तेलंगना संयुक्त संघर्ष समिति ने आज हैदराबाद में एक महाधरने का आयोजन किया है जिसमें तमाम संगठनों के नेता भाग ले रहे हैं.तेलंगाना के सरकारी कर्मचारियों की यूनियन के अध्यक्ष स्वामी गौड़ ने कहा है कि सरकारी कर्मचारी अपना काम रोक देंगे और असहयोग के ज़रिए काम-काज ठप कर दिया जाएगा. उनका कहना है कि प्रशासन को भी निलंबित कर दिया जाएगा.

इस बीच तेलंगाना आंदोलन का गढ़ माने जाने वाला उस्मानिया विश्वविद्यालय में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरु हो गया है.कल रात कुछ अज्ञात व्यक्तिओं ने विश्वविद्यालय परिसर में एक बस जला दी दो बसों के शीशे तोड़ डाले जिस के बाद वहां सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.तेलंगाना क्षेत्र के अन्य मुख्य केंद्रों वारंगल, निज़ामाबाद और मेदक में भी तनाव बढ़ गया है और हर जगह लोग श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट पर ही चर्चा कर रहे हैं.गृहमंत्री ने कहा है कि जनवरी के अंत तक इस मसले पर एक और सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी.

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