'अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा कर सकते हैं छोटे उपग्रह'

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के एडवांस्ड सिस्टम लेबोरेटरी के निदेशक अविनाश चंदर ने आईएएनएस को बताया, "वर्तमान में उपग्रह सुरक्षित नहीं हैं। अपने उपग्रहों पर दुश्मन के हमलों का जवाब देने का एक ही रास्ता है कि उसके उपग्रहों को मार गिराया जाए।"

कट्टनकुलाथुर के एसआरएम विश्वविद्यालय में आयोजित भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 98वें सम्मेलन में चंदर ने कहा कि इस वर्ष के अंत तक भारत अपने अंतर महाद्विपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर सकता है।

यह पूछे जाने पर कि हमलों से बचाने के लिए क्या उपग्रहों को हथियारों से लैस किया जा सकता है, इस पर उन्होंने कहा, "अंतरिक्ष में हथियारों के साथ 30 से 60 किलोग्राम के छोटे उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की सम्भावना है। दुश्मन के हमलों के समय इन्हें धरती से सक्रिय किया जा सकता है।"

चंदर ने हालांकि कहा कि अपने उपग्रहों को हथियारों से लैस करने की भारत की कोई योजना नहीं है।

उल्लेखनीय है कि चीन मिसाइल से उपग्रहों को मार गिराने की अपनी क्षमता दो बार प्रदर्शित कर चुका है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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