संयुक्त आंध्र सर्वश्रेष्ठ, पृथक तेलंगाना दूसरा विकल्प : श्रीकृष्णा समिति (लीड-3)

समिति के मुताबिक दूसरा सबसे अच्छा विकल्प मौजूदा सीमा क्षेत्र के हिसाब से राज्य का तेलंगाना और सीमांध्र में बंटवारा है, जिसमें हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी बनाए जाने की बात है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर गुरुवार को जारी की गई इस रिपोर्ट में जो छह विकल्प सुझाए गए हैं उनमें पहला है वर्तमान स्थिति को बनाए रखना। समिति ने अपने सर्वसम्मत विचार में कहा है कि जैसी परिस्थिति है उसे उसी तरह छोड़ देना व्यवहारिक नहीं होगा। कुछ हस्तक्षेप जरूरी है। समिति के मुताबिक इस विकल्प को सबसे कम लोगों ने पसंद किया।

समिति ने जो दूसरा विकल्प प्रस्तुत किया है उसमें राज्य को सीमांध्र और तेलंगाना में बांटने की बात है। इसमें हैदराबाद को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने तथा दोनों क्षेत्रों द्वारा आने वाले समय में अपनी-अपनी राजधानियां विकसित करने की बात कही गई है। समिति ने अपनी प्रतिक्रिया में इस विकल्प को अव्यावहारिक बताया है।

समिति ने तीसरे विकल्प में राज्य को रायल-तेलंगाना और तटीय आंध्र में बंटवारे की बात कही है जिसमें हैदराबाद को रायल-तेलंगाना का अभिन्न हिस्सा बनाए जाने की बात है। समिति ने कहा है कि इसे न तो तेलंगाना समर्थक और न ही संयुक्त आंध्र समर्थक स्वीकार करेंगे। समिति के मुताबिक यह विकल्प तीनों क्षेत्रों के लोगों को स्वीकार्य नहीं होगा।

समिति ने अपने चौथे विकल्प में आंध्र प्रदेश को सीमांध्र और तेलंगाना में बांटने के साथ ही वृहद हैदराबाद महानगर को पृथक केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने की बात है। इस केंद्र शासित प्रदेश की भौगोलिक स्थिति राज्य के तीनों हिस्सों से सम्बंधित रहेगी। समिति के मुताबिक तेलंगाना समर्थक इसका पुरजोर विरोध करेंगे और इसलिए इस विकल्प पर राजनीतिक सहमति नहीं बन सकेगी।

समिति ने अपने पांचवे विकल्प में कहा है कि राज्य को वर्तमान सीमा क्षेत्र के मद्देनजर तेलंगाना और सीमांध्र में बांट दिया जाए। हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी बनाई जाए और सीमांध्र क्षेत्र अपनी नई राजधानी चुने।

समिति ने कहा कि इस विकल्प पर विचार किया जा सकता है। उसके मुताबिक तेलंगाना राज्य की मांग में कुछ दम है और यह पूरी तरह गैरवाजिब भी नहीं है। इस विकल्प के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद समिति ने अपनी राय में कहा है कि अलग तेलंगाना राज्य के गठन से क्षेत्र की अधिकांश जनता संतुष्ट महसूस करेगी लेकिन इसके साथ ही कई समस्याएं भी खड़ी हो जाएंगी।

समिति ने कहा है कि इस विकल्प के नफे व नुकसान को देखते हुए वह इसे दूसरा सर्वश्रेष्ठ विकल्प समझती है। यह तभी हो जब इसे रोकना असंभव हो जाए और तीनों क्षेत्रों के लोगों के बीच शांतिपूर्ण सहमति बने।

समिति ने छठे और अपने अंतिम विकल्प में राज्य को एकीकृत बनाए रखने और तेलंगाना क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास तथा उसके राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए उसे संवैधानिक शक्तियां मुहैया कराने तथा संवैधानिक शक्ति सम्पन्न तेलंगाना क्षेत्रीय परिषद के गठन की बात कही है।

समिति ने कहा है कि राष्ट्रीय परिदृश्य को देखते हुए यह विकल्प सर्वश्रेष्ठ है और इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। समिति के मुताबिक यह विकल्प तीनों क्षेत्रों के हित में होगा।

समिति की रिपोर्ट पर केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने गुरुवार को सभी राजनीतिक दलों व समूहों से आग्रह किया है कि वे खुले दिमाग से इस रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद ही इस पर कोई परिणाम निकाले।

चिदम्बरम ने रिपोर्ट पर चर्चा के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, "मैं सभी राजनीतिक दलों व मामले से जुड़े सभी पक्षों से आग्रह करता हूं कि वे रिपोर्ट को पूरी तरह पढ़े बिना कोई तात्कालिक परिणाम न निकालें। इसमें छह विकल्प सुझाए गए हैं और समिति ने प्रत्येक विकल्प के नफे-नुकसान की जानकारी के साथ अपना दृष्टिकोण भी पेश किया है।"

उन्होंने कहा कि समिति ने ही पहले तीनों विकल्पों को अव्यवहारिक बताते हुए खारिज कर दिया है। शेष तीन विकल्पों पर आगे का रास्ता देखा जा सकता है।

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के तेलंगाना क्षेत्र के नेताओं ने समिति की रिपोर्ट पर निराशा जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के अलावा कोई विकल्प मंजूर नहीं।

टीआरएस विधायक के. तारकरामा राव ने संवाददाताओं को बताया कि इस समस्या का एकमात्र व्यवहारिक हल पृथक तेलंगाना राज्य का गठन है जो 10 जिलों को मिलाकर बनाया जाए और हैदराबाद को उसकी राजधानी बनाया जाए।

राव ने कहा, "समिति द्वारा सुझाया गया अन्य कोई भी विकल्प तेलंगाना की जनता को स्वीकार्य नही हैं। केंद्र सरकार को लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए और अपने वायदे के अनुरूप पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए तत्काल कदम उठाना चाहिए।"

तेलंगाना क्षेत्र के तेदेपा नेताओं ने भी श्रीकृष्णा समिति की रिपोर्ट को नकार दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों को पृथक तेलंगाना राज्य से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।

तेदेपा तेलंगाना फोरम के समन्वयक नागम जनार्दन रेड्डी ने कहा, "हम उम्मीद कर रहे थे कि समिति तेलंगाना राज्य के गठन के लिए सीधा विकल्प सुझाएगी लेकिन उसने विभिन्न तरह के सुझाव देकर क्षेत्र के लोगों का अपमान किया है।"

पूर्व मंत्री ने कहा, "मैं कांग्रेस को चेतावनी देता हूं कि वह लोगों की भावनाओं के साथ न खेले और संसद के अगले सत्र में विधेयक लाकर तेलंगाना का गठन करे। "

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने कहा है कि समिति की रिपोर्ट से भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। भाकपा के राज्य महासचिव के. नारायण ने कहा कि केंद्र सरकार को तेलंगाना के गठन में देरी नहीं करनी चाहिए।

461 पृष्ठों की श्रीकृष्णा समिति की रिपोर्ट दो खंडों और नौ अध्याय में हैं। इन अध्यायों में आंध्र प्रदेश के विकास जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। इसमें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, क्षेत्रीय आर्थिक एवं समान हिस्सों का विश्लेषण, शिक्षा तथा स्वास्थ्य, जल संसाधन, कृषि एवं विद्युत विकास, रोजगार के मुद्दे, हैदराबाद महानगर से जुड़े मुद्दे, सामाजिक तथा सांस्कृतिक मुद्दे तथा कानून एवं व्यवस्था व आंतरिक सुरक्षा के आयामों का जिक्र है।

समिति के अध्यक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी.एन. कृष्णा ने कहा कि यह आसान कार्य नहीं था। उन्होंने कहा, "समिति के लिए यह आवश्यक हो गया था कि वह विस्तृत अनुसंधान कार्य करे और सभी साझेदारों से व्यापक परामर्श ले। परामर्श लेने के दौरान समिति ने विभिन्न राजनीतिक दलों एवं सम्बंधित समूहों से आजादी के समय से लेकर अब तक आंध्र प्रदेश की ऐतिहासिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं पर चर्चा की।"

समिति का गठन तीन फरवरी, 2010 को किया गया था। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव वी.के. दुग्गल इसके सदस्य सचिव थे। अन्य सदस्य थे दिल्ली स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति रणबीर सिंह, अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के फेलो अबू सलेह शरीफ तथा दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की प्रोफेसर रविन्दर कौर।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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