उल्फा अध्यक्ष के साथ पहले दौर की शांति वार्ता संपन्न
बैठक के बाद हाल्दार ने बताया, "यह बहुत ही सकारात्मक शुरुआत है। उल्फा अध्यक्ष ने बिना शर्त शांति वार्ता की इच्छा जताई है।"
अरविंद राजखोवा गत शनिवार को गुवाहाटी के केंद्रीय जेल से जमानत पर रिहा हुए। रिहाई के बाद उनकी यह पहली बैठक थी।
बैठक में राजखोवा और उल्फा के उप मुख्य कमांडर राजू बरुआ ने हिस्सा लिया।
सरकार ने पिछले महीने बरुआ को जमानत पर रिहा किया। सरकार औपचारिक रूप से शांति वार्ता का रास्ता साफ करने के लिए रणनीति के तहत जेल में बंद उल्फा के सभी शीर्ष नेताओं को रिहा करने वाली है।
राजखोवा सहित उल्फा के छह शीर्ष नेता पहले ही रिहा किए जा चुके हैं। संगठन के मात्र दो नेता स्वयंभू विदेश सचिव सशा चौधरी और वित्त सचिव चित्रबन हजारिका अभी जेल में हैं।
उल्फा अध्यक्ष ने कहा, "जेल से रिहा होने के बाद यह मेरी पहली बैठक है और हमने औपचारिक शांति वार्ता की शुरुआत और उसकी रूपरेखा के बारे में चर्चा की।"
उल्लेखनीय है कि उल्फा ने संगठन के महासचिव अनूप चेतिया को बांग्लादेश से प्रत्यर्पित कराने के लिए नई दिल्ली से मदद मांगी थी। चेतिया को वर्ष 1997 में गिरफ्तार किया गया और वह बांग्लादेश में बंद है।
हाल्दार से यह पूछे जाने पर कि क्या परेश बरुआ की अनुपस्थिति शांति वार्ता में व्यवधान उपस्थित कर सकती है। इस पर उन्होंने कहा, "यह राजखोवा अथवा परेश बरुआ के साथ वार्ता जारी रखना नहीं है। हम उल्फा के साथ वार्ता कर रहे हैं, किसी व्यक्ति विशेष से नहीं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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