सेन के खिलाफ राजद्रोह मुकदमा वापस लेने की मांग
अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने भारतीय संसद से औपनिवेशक समय के राजद्रोह के कानून को निरस्त करने का अनुरोध भी किया। संस्था ने कहा कि अधिकारियों ने इस कानून का इस्तेमाल 'शांतिपूर्ण राजनीतिक असहमति को दबाने' के लिए किया।
संस्था ने अपने बयान में कहा कि अधिकारियों ने शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं के खिलाफ राजद्रोह का अभियोग लगाया है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के मुताबिक हिंसा के लिए उकसाने पर ही किसी पर राजद्रोह का अभियोग लगाया जा सकता है। संस्था ने कहा कि ऐसा मामला कार्यकर्ताओं पर नहीं है।
ह्यूमन राइट्स वाच में दक्षिण एशिया की निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा, "शांतिपूर्ण आलोचना की आवाज दबाने के लिए राजद्रोह कानून का इस्तेमाल दमनकारी सरकार का प्रमाण है।"
उन्होंने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात को माना है कि राजद्रोह कानून का इस्तेमाल इस तरह के उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता और भारतीय संसद को न्यायालय की इस भावना को प्रदर्शित करने के लिए कानून में संशोधन अथवा इसे निरस्त करना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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