श्रीकृष्णा समिति का संयुक्त आंध्र प्रदेश पर जोर
रिपोर्ट में कहा गया है, "जांच की समाप्ति पर यह सामने आया कि मामले दो तरह के हैं- एक पृथक तलंगाना के गठन और दूसरा राज्य को संयुक्त रखने के पक्ष में। कुछ अन्य विकल्प भी दिए गए हैं, जैसे कि रायलसीमा क्षेत्र तथा राज्य के कुछ अन्य हिस्सों के पिछड़ेपन के मुद्दे पर रोशनी डाली गई है। साथ ही विभिन्न साझेदारों का पता भी लगाया गया है।"
तेलंगाना में हैदराबाद सहित 10 जिले हैं जो कभी हैदराबाद के निजाम के हिस्से थे। 1956 में पहला भाषा (तेलुगू) आधारित आंध्र प्रदेश का गठन हुआ था, जिसमें इन जिलों को तत्कालीन आंध्र राज्य से मिलाया गया था।
रिपोर्ट में छह वैकल्पिक समाधान सुझाए गए हैं। 461 पृष्ठों की श्रीकृष्णा समिति की रिपोर्ट दो खंडों और नौ अध्याय में हैं। इन अध्यायों में आंध्र प्रदेश के विकास जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। इसमें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, क्षेत्रीय आर्थिक एवं समान हिस्सों का विश्लेषण, शिक्षा तथा स्वास्थ्य, जल संसाधन, कृषि एवं विद्युत विकास, रोजगार के मुद्दे, हैदराबाद महानगर से जुड़े मुद्दे, सामाजिक तथा सांस्कृतिक मुद्दे तथा कानून एवं व्यवस्था व आंतरिक सुरक्षा के आयामों का जिक्र है।
समिति के अध्यक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी.एन. कृष्णा ने कहा कि यह आसान कार्य नहीं था। उन्होंने कहा, "समिति के लिए यह आवश्यक हो गया था कि वह विस्तृत अनुसंधान कार्य करे और सभी साझेदारों से व्यापक परामर्श ले। परामर्श लेने के दौरान समिति ने विभिन्न राजनीतिक दलों एवं सम्बंधित समूहों से आजादी के समय से लेकर अब तक आंध्र प्रदेश की ऐतिहासिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं पर चर्चा की।"
समिति का गठन तीन फरवरी, 2010 को किया गया था। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव वी.के. दुग्गल इसके सदस्य सचिव थे। अन्य सदस्य थे दिल्ली स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति रणबीर सिंह, अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के फेलो अबू सलेह शरीफ तथा दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की प्रोफेसर रविन्दर कौर।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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