'आरुषि हत्याकांड सुलझाने में फिंगरप्रिंट्स का सही इस्तेमाल नहीं'

भोपाल, 6 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के निदेशक एन.के. त्रिपाठी ने गुरुवार को यहां कहा कि यदि आरुषि तलवार हत्याकांड मामले में फिंगरप्रिंट्स इकट्ठे किए जाते और उनका ठीक से विश्लेषण किया जाता तो परिणाम कुछ और होता।

मध्य प्रदेश कैडर के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी त्रिपाठी यहां फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों के एक सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने किसी आपराधिक मामले में फिंगरप्रिंट इकट्ठे करने का महत्व बताने के लिए आरुषि हत्याकांड का मामला उदाहरण के तौर पर पेश किया।

उन्होंने कहा कि जांच के तरीके में लापरवाही बरती गई है लेकिन अनसुलझे मामले के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को दोष नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंची स्थानीय पुलिस ने महत्वपूर्ण सबूतों की अनदेखी की थी।

चौदह वर्षीय आरुषि को 16 मई, 2008 को तलवार परिवार के नोएडा में जलवायु विहार स्थित अपार्टमेंट में संदिग्ध अवस्था में मृत पाया गया था। इसके एक दिन बाद उनके अपार्टमेंट की छत पर तलवार परिवार के घरेलू नौकर हेमराज का शव पाया गया।

इससे पहले सीबीआई ने 29 दिसम्बर, 2010 को गाजियाबाद अदालत से सबूतों के अभाव में अनसुलझा आरुषि हत्याकांड मामला बंद करने की इजाजत मांगी थी।

सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में आरुषि व तलवार परिवार के नौकर की हत्या के मामले में राजेश तलवार को एकमात्र संदिग्ध बताया था।

त्रिपाठी ने कहा, "जब सीबीआई के पास यह मामला पहुंचा तो उनके पास इसमें ज्यादा कुछ खोज पाने की सम्भावना नहीं थी।"

उन्होंने कहा कि वह इस मामले की जांच से सम्बद्ध नहीं है इसलिए उनकी बातों को बयान के तौर पर न देखा जाए।

उन्होंने कहा, "यह सिर्फ एक उदाहरण है कि फिंगरप्रिंट्स कितने महत्वपूर्ण हो सकते हैं और हत्यारे तक पहुंचने के लिए इन्हें बहुत सावधानी से इकट्ठा किया जाना चाहिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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