गाजीपुर में पुलिस पर हमला, 1 की मौत (लीड-2)
उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) बृजलाल ने कहा कि अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में, लेकिन तनावपूर्ण है। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) की एक कम्पनी को तैनात किया गया है।
बृजलाल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "प्रदर्शनकारियों का सम्बंध भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) से है। उन्होंने (प्रदशर्नकारियों) पुलिसकर्मियों पर उस समय हमला कर दिया जब वे समझ्झा-बुझ्झाकर स्थिति को सामान्य करने का प्रयास कर रहे थे।"
बृजलाल ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ तोड़फोड़ और आगजनी की, बल्कि उन्होंने पुलिस पर गोलियां भी चलाईं। ऐसा प्रतीत होता है कि चौकी प्रभारी (उप निरीक्षक) रामाराव की मौत गोली लगने से हुई, क्योंकि उनके सिर पर गोली का निशान मिला है। सभी घायलों का जिला अस्पताल में उपचार किया जा रहा है।
यह पूछे जाने पर कि इस हमले में क्या नक्सलियों का हाथ था, लाल ने कहा कि जमनिया कस्बा बिहार की सीमा के निकट है। जांच की जा रही है कि प्रदर्शनकारियों के सम्बंध नक्सलियों से थे या नहीं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रदर्शनकारी 'शोषित समाज दल' के बैनर तले डाकघर में चोरी के आरोप में एक व्यक्ति के पकड़े जाने का विरोध कर रहे थे।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक हमलावरों में महिलाएं भी शामिल थीं, लेकिन फिलहाल किसी महिला की गिरफ्तारी नहीं हुई है। गिरफ्तार लोगों ने बताया कि झड़प के दौरान दो-तीन उनके लोग भी घायल हुए हैं। उनके बारे में हालांकि कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है।
गौरतलब है कि पुलिस ने जिले के जमनिया कस्बे के उप-डाकघर में नौ दिसम्बर को हुई चोरी के आरोप में स्थानीय निवासी मनोज बिंद को मंगलवार को हिरासत में लेकर उससे नकदी व अन्य सामान बरामद करने का दावा किया था। पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में सैकड़ों लोगों ने पुलिस चौकी के बाहर प्रदर्शन किया।
इंडो-एशयिन न्यूज सर्विस।


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