जर्मनी में बने कनेक्टर असफल हुए थे : इसरो
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के उपग्रह केंद्र के निदेशक टी.के. एलेक्स 98वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अंतरिक्ष सम्मेलन सत्र से इतर पत्रकारों से कहा, "कनेक्टर्स जर्मनी में बने थे।"
ज्ञात हो कि गत 25 दिसम्बर को 175 करोड़ की लागत से बने 418 टन भार वाले जीएसएलवी प्रक्षेपण के एक मिनट के भीतर अपने पथ से भटक गया और इसमें टुकड़े हो गए।
रॉकेट को अत्याधुनिक संचार उपग्रह जीसेट 5पी को अंतरिक्ष कक्ष में स्थापित करना था। इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था।
इसरो के मुताबिक इन 10 कनेक्टरों को रूस में बने क्रायोजेनिक इंजन के नीचले हिस्से में लगाया गया था। इन कनेक्टरों में आई खराबी की वजह से रॉकेट असफल हो गया।
यह पूछे जाने पर कि क्या यह कनेक्टरों की अफसलता का पारिणाम है। इस पर एलेक्स ने कहा, "कनेक्टरों के टूटने की वजहों का अध्ययन करने के लिए एक समिति बनाई गई है। यहां तक कि अतिरिक्त कनेक्टरों में भी टुकड़े हो गए।"
पिछले साल जुलाई में इसरो के एक अधिकारी ने कहा कि ऊर्जा प्रणाली के लिए आयातित उपकरणों की असफलता उसके उपग्रहों की नाकामी की वजह है।
उल्लेखनीय है कि इसरो को अपने दो उपग्रहों के प्रक्षेपण में असफलता मिली है। वर्ष 2009 में चंद्रायन और वर्ष 1997 में इनसेट 2डी के प्रक्षेपण सफल नहीं हो सके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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