'सिटी बैंक जालसाजी में शीर्ष अधिकारी शामिल'
इस जालसाजी में 33 करोड़ रुपये गंवाने का दावा करने वाले अग्रवाल ने संवाददाताओं से कहा कि एक व्यक्ति यह नहीं कर सकता है। यह बैंक की पूरी व्यवस्था का दोष है। आप सिर्फ एक व्यक्ति को जवाबदेह नहीं ठहरा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सिटी बैंक में ग्राहकों से रिक्त दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लेने की आम प्रथा है।
अग्रवाल ने कहा कि सिटी बैंक में रिक्त दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लेने का रिवाज है, जिससे उन्हें शेयरों को खरीदने और बेचने की अनुमति मिल जाती है। इसका उपयोग बैंक कर्मियों ने पैसे को हमारे खाते में डालने के बदले अपने खाते में डालने में किया।
अग्रवाल बीपीओ कम्पनी दक्ष के सह संस्थापक हैं, जिसका बाद में आईबीएम ने अधिग्रहण कर लिया। उन्होंने कहा कि वह 2004 से सिटी बैंक की संपत्ति प्रबंधन योजनाओं में निवेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जालसाजी पिछले एक साल में हुई है।
उन्होंने कहा कि बैंक ने उन्हें दिसम्बर के पहले सप्ताह में जालसाजी की सूचना दी।
उन्होंने कहा कि वे सिर्फ यह चाहते हैं कि सिटी बैंक इस जालसाजी की जवाबदेही ले और उनके नुकसान की भरपाई करे।
अग्रवाल ने मंगलवार को गुड़गांव के डीएलएफ-2 पुलिस थाने में सिटी बैंक और 11 अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विक्रम पंडित, अध्यक्ष विलियम रोड्स, मुख्य वित्तीय अधिकारी जॉन गोर्सपेक और मुख्य संचालन अधिकारी डगलस पीटरसन सहित रिलेशनशिप मैनेजर शिवराज पुरी को भी नामजद किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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