नया नालंदा स्थापित करना एक चुनौती : अमर्त्य सेन
एसआरएम विश्वविद्यालय में चल रहे 98वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शुरू होने जा रहा है और चूंकि वे इसकी अंतरिम शासकीय परिषद के अध्यक्ष हैं इसलिए वे समझते हैं कि 800 साल बाद किसी विश्वविद्यालय को दोबारा शुरू करना कितना कठिन है।
सेन ने यहां नालंदा विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख किया, जो कभी ज्ञान विज्ञान का दुनिया का प्रतिष्ठित केंद्र हुआ करता था, लेकिन 1193 में अफगानी आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने इसे नष्ट कर दिया।
जापान, चीन, सिंगापुर, थाईलैंड और भारत सम्मिलित रूप से नालंदा विश्वविद्यालय के पुर्निर्माण में भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना पांचवीं सदी में की गई थी, जिसके बाद लगातार 700 सालों तक विकास करते हुए यह उस समय नष्ट हुआ जब ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की नींव रखी जा रही थी।
उन्होंने नालंदा की तुलना यूरोप के प्राचीनतम विश्वविद्यालय बोलोग्ना से भी की और कहा कि जब बोलोग्ना की स्थापना की जा रही थी, तब नालंदा विश्वविद्यालय 600 साल पूरे कर चुका था।
इसी तरह एक अन्य प्राचीनतम विश्वविद्यालय कैरो के अल-अजहर विश्वविद्यालय से नालंदा की तुलना की जाती है, लेकिन इसकी स्थापना भी नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना के करीब पांच सौ साल बाद 970 ईस्वी में की गई थी।
उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय के विद्वानों के दस्तावेजों के मुताबिक यहां चिकित्सा, लोक स्वास्थ्य, वास्तुशास्त्र, मूर्तिकला, धर्म, इतिहास, कानून और भाषा शास्त्र की शिक्षा दी जाती थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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