धूम्रपान छोड़ने के लिए इच्छाशक्ति ही काफी नहीं
नई दिल्ली, 4 जनवरी (आईएएनएस)। नव वर्ष की शुरुआत के साथ बहुत से लोगों ने धूम्रपान छोड़ने का संकल्प लिया है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए केवल इच्छाशक्ति ही काफी नहीं है। इसके लिए चिकित्सकीय मदद की भी आवश्यकता है।
विशेषज्ञों की राय में डॉक्टरों की सलाह और सिगरेट के स्थान पर निकोटीन की मौजूदगी वाली किसी अन्य चीज के इस्तेमाल से धूम्रपान छोड़ने में मदद मिल सकती है।
एक 25 वर्षीय सॉफ्टवेयर कार्यकारी राशिद का कहना है, "यह ऐसा तीसरा साल है जब मैंने नए साल के दिन धूम्रपान छोड़ने का संकल्प लिया लेकिन हमेशा दो जनवरी को ही मेरा यह संकल्प टूट जाता है।"
लोग कामकाज सम्बंधी तनाव, जीवनशैली और दोस्तों के दबाव के चलते धूम्रपान करते हैं और ज्यादातर के लिए इस लत से छुटकारा पाना बेहद मुश्किल होता है।
मुम्बई के हीलिस शेखसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के निदेशक पी.सी. गुप्ता ने आईएएनएस से कहा, "लोगों को जिन चीजों की लत सबसे ज्यादा होती है उनमें निकोटीन सबसे ऊपर है।"
उन्होंने कहा, "सिगरेट और चबाने वाली तम्बाकू में निकोटीन होती है जो उन्हें आदी बना देती है। सिगरेट से निकलने वाली निकोटीन 10 सेकंड के अंदर फेंफड़ों से होती हुई दिमाग में पहुंच जाती है। निकोटीन की मात्रा इतनी जल्दी-जल्दी मिलने के कारण इसकी आदत पड़ जाती है।"
विशेषज्ञों का कहना है कि तम्बाकू छोड़ने से निकोटीन के लिए तलब खत्म हो जाती है और इसमें पेशेवर सहायता मददगार हो सकती है।
सिकंदराबाद के यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में 'पल्मोनरी मेडीसिन एंड क्रिटिकल केयर' के निदेशक विजय कुमार कहते हैं कि कई शोध अध्ययन बताते हैं कि धूम्रपान रोकने में स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवर मददगार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में लोग धूम्रपान छोड़ने के लिए सिर्फ अपनी इच्छाशक्ति पर भरोसा करते हैं। वैसे निकोटीन नशे की लत वाला रसायन है और इससे छुटकारे के लिए मदद लेना ठीक है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक एक साल में करीब 54 लाख लोगों की तम्बाकू के इस्तेमाल से मौत हो जाती है। वर्ष 2015 तक यह संख्या बढ़कर 65 लाख व 2030 तक 83 लाख हो जाएगी।
विशेषज्ञ निकोटीन की लत छोड़ने के लिए 'निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी' (एनआरटी) के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। इसमें व्यक्ति को सिगरेट या तम्बाकू के स्थान पर एनआरटी उत्पाद दिए जाते हैं। एनआरटी उत्पादों में जो निकोटीन होती है उसमें से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्व निकाल दिए जाते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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