'बोफोर्स सौदे में क्वोत्रोच्चि और सहयोगी को मिला 41.2 करोड़ रुपये कमीशन'
फैसले में कहा गया कि सरकार की नीति के मुताबिक इस सौदे में बिचौलियों की कोई जगह नहीं थी। उसके बावजूद मेसर्स ए. बी. बोफोर्स ने दोनों को दलाली दी थी।
फैसले में कहा गया कि बोफोर्स सौदे में दलाली के रूप में दी गई 41.2 करोड़ रुपये की राशि को सौदे के मूल्य में से घटा दिया जाना चाहिए था, क्योंकि सरकार को इसके कारण इस राशि का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा था।
न्यायाधिकरण ने कहा कि भारतीय नियमों के तहत दलाली या प्रोत्साहन के रूप में दी गई राशि कर योग्य है और चूंकि उस समय क्वोत्रोच्चि और उसके सहयोगी भारत में रह रहे थे, इसलिए उन्हें दलाली के रूप में दी गई राशि पर कर चुकाना चाहिए था। चड्ढा की 2001 में मृत्यु हो चुकी है।
उल्लेखनीय है कि न्यायाधिकरण का आदेश दिल्ली की अदालत की बोफोर्स से जुड़े एक संभावित फैसले से एक दिन पहले आया है, जिसमें सीबीआई ने अदालत से क्वोत्रोच्चि के खिलाफ चल रहे मामले को बंद करने की याचिका लगाई है। सीबीआई की दलील है कि इस मामले में कोई सबूत उपलब्ध नहीं है और इस मामले को आगे बढ़ाकर कुछ भी हासिल नहीं होगा।
न्यायाधिकरण के फैसले ने विपक्ष को कांग्रेस पर निशाना साधने का एक और मौका दे दिया, जो पहले ही 2जी स्पेक्ट्रम और राष्ट्रमंडल खेल से जुड़ी अनियमितता के मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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