राजस्थान सरकार और गुर्जरों के बीच बातचीत थमी (लीड-2)
जयपुर, 3 जनवरी (आईएएनएस)। राजस्थान सरकार और आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलनरत गुर्जरों के बीच सोमवार को शुरू हुई बातचीत फिर थम गई। समुदाय के नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने उनकी तीन प्रमुख मांगें नहीं मानी हैं। इस बीच उनका आंदोलन 15वें दिन भी जारी रहा।
बैठक के तुरंत बाद प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हिम्मत सिंह ने संवाददाताओं से कहा, "उन्होंने हमारी यह मांग नहीं मानी कि आरक्षण मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान निकलने तक सरकारी नौकरियों में नियुक्ति की प्रक्रिया रोक दी जाए। दूसरी बात कि सरकार हमें यह बताकर संतुष्ट करने में विफल रही है कि पांच फीसदी आरक्षण हमें किस तरह और कब मुहैया कराया जाएगा।"
सिंह ने कहा, "उन्होंने (राज्य सरकार) हमें यह आश्वासन भी नहीं दिया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे।" उन्होंने कहा कि आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल (सेवानिवृत्त) के.एस. बैंसला यह निर्णय लेंगे कि आंदोलनकारियों को अब क्या करना है।
सरकार ने हालांकि कहा है कि वार्ता लाभप्रद रही।
गुर्जर नेताओं के साथ बातचीत के लिए अधिकृत तीन मंत्रियों में से एक राज्य के गृह मंत्री शांति धारीवाल ने कहा, "इन वार्ताओं से मुद्दे के सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में आगे कदम बढ़ाने में हमें मदद मिली है।"
धारीवाल ने कहा, "उनकी 12 मांगों में से नौ पर हमारी सहमति बनी। हम कल (मंगलवार) भी वार्ता कर सकते हैं। हम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं बैंसला से वार्ता करेंगे और शेष तीन मुद्दों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने का प्रयास करेंगे।"
अधिकारियों ने यहां कहा कि गुर्जरों के 51 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और राज्य सरकार की तीन मंत्रियों वाली समिति के बीच मुख्य सचिवालय भवन में सोमवार को अपराह्न् लगभग 12.30 बजे आगे की बातचीत शुरू हुई। रविवार शाम लगभग सात बजे गुर्जर प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच शुरू हुई बातचीत अधूरी रह गई थी।
मंत्रियों की इस समिति में राज्य के ऊर्जा मंत्री जीतेंद्र सिंह, गृह मंत्री शांति धारीवाल और परिवहन मंत्री बी.के.शर्मा शामिल हैं।
राज्य गृह विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "हमने उनकी कुछ मांगें मान ली हैं और हमें इस समस्या के किसी उचित समाधान की आशा है।"
लेकिन गुर्जर पांच प्रतिशत आरक्षण की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
गुर्जर प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य श्रीकृष्ण बैंसला ने कहा, "हम पांच प्रतिशत आरक्षण से कम कुछ नहीं चाहते और हमारा आंदोलन तभी समाप्त होगा जब हमारी मांगें मान ली जाएंगी।"
जहां एक ओर गतिरोध तोड़ने की कोशिशें लगातार जारी हैं, वहीं गुर्जर समुदाय के लोग सोमवार सुबह भी भरतपुर जिले में बयाना के पास रेल पटरी पर धरने पर बैठे रहे। परिणामस्वरूप दिल्ली और मुम्बई के बीच रेल सेवाएं बाधित रहीं।
गुर्जरों का रेल रोको आंदोलन 20 दिसम्बर को बयाना में हुई महापंचायत के बाद शुरू हुआ था।
कर्नल बैंसला गुर्जर प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं हैं। समिति के प्रवक्ता रूप सिंह ने रविवार को आईएएनएस को बताया था कि बैंसला के बदले बसंत सरपंच प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
गतिरोध दूर करने के लिए मुख्यमंत्री गहलोत ने शुक्रवार को गुर्जर नेताओं से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पूर्व कांग्रेस विधायक हरिसिंह महुआ ने किया था।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार ने 2009 में गुर्जरों को पांच फीसदी एवं आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को 14 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की थी। इस तरह राज्य में समाज के विभिन्न वर्गो के लिए कुल आरक्षण 68 फीसदी तक पहुंच गया, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने 50 फीसदी आरक्षण ही तय किया है। इसलिए 22 दिसम्बर, 2010 को उच्च न्यायालय ने गुर्जरों के आंदोलन पर रोक लगा दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications