राजखोवा चाहते हैं समस्या का अर्थपूर्ण समाधान
सैयद जरीर हुसैन
लाकवा (असम), 3 जनवरी (आईएएनएस)। हाल ही में जमानत पर रिहा हुए प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन, युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के अध्यक्ष अरविंद राजखोवा महसूस करते हैं कि आगे का रास्ता चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वह समस्या का अर्थपूर्ण समाधान चाहते हैं।
एक वर्ष जेल में रहने के बाद राजखोवा शनिवार को जमानत पर रिहा हुए थे। राजखोवा को बांग्लादेश में गिरफ्तार करने के बाद भारतीय अधिकारियों को असम में सौंप दिया गया था।
गुवाहाटी जेल से अपनी रिहाई के बाद रविवार देर शाम पूर्वी असम के शिवसागर जिले में लाकवा स्थित अपने पैतृक घर पहुंचने से पहले, राजखोवा दर्जन भर सार्वजनिक सभाओं को सम्बोधित कर चुके हैं।
गुवाहाटी से लाकवा के बीच का कोई 390 किलोमीटर लम्बा मार्ग बैनरों और स्वागत द्वारों से पटा पड़ा था। रास्ते भर स्थानीय लोगों ने राजखोवा का स्वागत किया।
अपने घर पर सोमवार को जुटे एक जनसमूह को सम्बोधित करते हुए राजखोवा ने कहा, "जोश में आने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आगे की यात्रा चुनौतीपूर्ण है।"
राजखोवा इसके पहले 1983 में अपने पैतृक घर आए थे। उसके बाद से वह भूमिगत थे और ज्यादा समय उन्होंने भूटान व बांग्लादेश में बिताया था। उन्हें दिसम्बर 2009 में ढाका में हिरासत में ले लिया गया था।
राजखोवा और पांच अन्य ने सात अप्रैल, 1979 को ऐतिहासिक रंग घर के प्राचीर पर उल्फा की स्थापना की थी। यह स्थल 16वीं शताब्दी के अहोम राजघराने की रंगभूमि रही है।
राजखोवा ने कहा, "कोई 30 साल पहले हमने रंग घर से एक संघर्ष की शुरुआत की थी आज 30 वर्ष बाद एक दूसरा लम्बा संघर्ष शुरू हुआ है।"
राजखोवा ने कहा, "हमने न तो समझौता किया है और न आत्मसमर्पण ही। लेकिन हम बिना शर्त शांति वार्ता और असम-भारत विवाद का एक अर्थपूर्ण समाधान चाहते हैं।"
उल्फा अध्यक्ष ने कहा, "यह सच है कि पिछले 30 वर्षो में हम एक इंच भूमि भी मुक्त नहीं करा पाए हैं, लेकिन भारत सरकार भी अपनी सम्पूर्ण सैन्य ताकत के साथ उल्फा को मिटा नहीं पाई है।"
राजखोवा ने सोमवार को आईएएनएस के साथ एक अनौपचारिक बातचीत में कहा, "समय आ गया है कि असम के लोग शांति वार्ता का पूरी तरह समर्थन करें और हम हर कदम पर जनता का सहयोग और समर्थन चाहते हैं।"
राजखोवा ने कहा, "हमने एक कारणवश हथियार उठाया था और अब एक समझौते का अवसर आया है। इसलिए हर किसी को चाहिए कि हमें मदद करे ताकि हम अपने लक्ष्य के साथ समझौता किए बगैर कुछ अर्थपूर्ण समाधान हासिल कर सकें।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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