नेपाली माओवादियों ने अदालत जाने की चेतावनी दी

सुदेशना सराकार

काठमांडू, 3 जनवरी (आईएएनएस)। नेपाल में शांति वार्ता में प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी का कार्यकाल जहां 12 दिनों में समाप्त होने वाला है, वहीं नेपाल की कार्यवाहक सरकार एजेंसी के कार्यकाल को दूसरा विस्तार दिए जाने की मांग करने को राजी नहीं है। ऐसे में माओवादियों ने सत्ताधारी गठबंधन के रुख में बदलाव लाने के लिए अदालत जाने की चेतावनी दी है।

माओवादी सांसद एवं पार्टी की गुरिल्ला सेना के पूर्व उप प्रमुख, बर्षमान पुन अनंत ने पार्टी के मुखपत्र दैनिक 'जनदिशा' को सोमवार को बताया, "मध्यमार्गी ताकतें इस बात की साजिश रच रही हैं कि नेपाल में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएमआईएन) अपना मिशन पूरा किए बगैर ही देश से चला जाए।"

अनंत ने कहा, "संसद को भंग करने और तानाशाही ताकतों के हाथ में सत्ता जाने देने की छूट देने की यह एक साजिश है। हमारी पार्टी इस तरह के किसी कदम का समर्थन नहीं करेगी।"

सांसद अनंत ने चेतावनी दी है कि यदि यूएनएमआईएन को 15 जनवरी के बाद रुके रहने के लिए नहीं कहा गया तो उनकी पार्टी मिशन का कार्यकाल बढ़ाए जाने के लिए कानूनी कार्रवाई करेगी।

माओवादियों ने 2006 में अपने 10 वर्षीय सशस्त्र संघर्ष के अंत की घोषणा की थी और अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को भंग करने पर सहमति जताई थी। लेकिन शांति समझौते के चार वर्ष बीत जाने के बाद भी माओवादी अपने लगभग 20,000 लड़ाकों का भविष्य तय नहीं कर पाए हैं।

समझौते में हालांकि पीएलए का छह महीने के भीतर राष्ट्रीय सेना में विलय किए जाने का प्रावधान है। लेकिन सेना और कुछ सत्ताधारी पार्टियों के विरोध के कारण एकीकरण की यह योजना मूर्तरूप नहीं ले पाई है। माओवादियों का पक्ष उस समय और कमजोर हो गया, जब इस बात का खुलासा हुआ कि माओवादियों के प्रमुख पुष्प कमल दहाल प्रचंड ने राष्ट्रीय सेना में अपनी पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए यूएनएमआईएन के समक्ष जानबूझ कर पीएलए के अधिक सदस्यों की सूची पेश की थी।

अब माओवादियों की समानांतर सेना, शांति वार्ता की बहाली में एक बड़ा रोड़ा बनी हुई है।

यूएनएमआईएन का नेपाल में कार्यकाल सात बार बढ़ाया जा चुका है, क्योंकि नेपाली सेना के साथ पीएलए के विलय में माओवादी उसकी भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हैं।

सत्ताधारी पार्टियां हालांकि महसूस करती है कि माओवादी अपनी समानांतर सेना को लम्बे समय तक बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी को बिल्ली के पंजे की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही सरकार ने पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र लिख कर कहा था उसने यूएनएमआईएन के जाने के बाद उसका प्रभार संभालने के लिए एक विशेष समिति गठित कर दी है।

पिछले सप्ताह माओवादियों ने भी सुरक्षा परिषद को लिखा था कि यूएनएमआईएन का कार्यकाल 28 मई तक बढ़ा दिया जाए। नए संविधान के लिए भी 28 मई, 2011 की समय सीमा निर्धारित है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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