आदर्श घोटाला : महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने इस्तीफा दिया

मुम्बई, 3 जनवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग (एमएसएचआरसी) के सदस्य सुभाष लल्ला ने आदर्श कोऑपरेटिव सोसायटी विवाद के मद्देनजर सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लल्ला ने राज्यपाल के.शंकरनारायणन को अपना इस्तीफा सौंपा।

लल्ला ने हालांकि कहा है कि विवादास्पद आदर्श कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में फ्लैट खरीदने में उनकी कोई भूमिका नहीं रहीं है।

राज्यपाल ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।

लल्ला ने अपने इस्तीफे में कहा है, "मैंने कोई गलत काम नहीं किया है। इस्तीफा केवल एमएसएचआरसी की शुचिता बरकरार रखने के लिए दिया है।"

उन्होंने कहा कि वह सरकार व स्वयं को और शर्मिदगी बचाने के लिए भी इस्तीफा दे रहे हैं।

लल्ला ने कहा है, "मेरे दिवंगत पिता शालिग्राम लल्ला सैन्य इंजीनियरिंग सेवा में कार्यरत थे और काम्पटी छावनी (नागपुर जिला) से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे लगातार वहीं रहे थे।"

लल्ला ने कहा है, "आदर्श कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के मुख्य प्रमोटर आर.सी.ठाकुर अपनी सेवा के प्रारम्भिक दिनों में काम्पटी छावनी में कार्यरत थे और वह भी उसी बंग्ले (48, द माल, काम्पटी) में रहते थे, जिसमें मेरे पिता रह रहे थे। पड़ोसी होने के नाते दोनों का आपस में सम्पर्क हुआ। दोनों के बीच अच्छे सामाजिक सम्बंधों के कारण मेरे पिता को आदर्श कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में सदस्य बनाया गया, जो कि मूल रूप से रक्षा और रक्षा विभाग से सम्बद्ध कर्मियों और उनके परिवारों के लिए था।"

लल्ला ने लिखा है, "मेरे पिता के निधन के बाद सोसायटी की सदस्यता मेरी मां श्रीमती सुशीला शालिग्राम के नाम आ गई और रक्षाकर्मी से सम्बंधित होने के कारण उनकी पोती (मेरी बेटी) का नाम भी सदस्य के रूप में दर्ज हो गया था, क्योंकि सोसायटी गठन के प्रारम्भिक दौर में कुछ जगहें खाली थी। मेरी मां इस सोसायटी में जुलाई 1998 से सदस्य हैं और मेरी बेटी अप्रैल 1999 से।"

लल्ला ने यह भी कहा है कि वह मंत्रालय में पहली बार 2000 के मध्य में सामाजिक न्याय मंत्रालय के सचिव के पद पर नियुक्त हुए थे तथा 2004 में मुख्यमंत्री कार्यालय में नियुक्त हुए थे।

लल्ला ने कहा है, "इसलिए इस बात पर गौर किया जाना चाहिए कि सोसायटी में मेरे रिश्तेदारों की सदस्यता मेरे मंत्रालय पहुंचने से काफी पहले की है।"

लल्ला ने कहा है कि यद्यपि एमएसएचआरसी का आदर्श विवाद से कुछ भी लेना-देना नहीं है, लेकिन संस्थान की गरिमा को ध्यान में रखते हुए उन्हें आदर्श विवाद को इससे दूर रखना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा है, "यद्यपि मेरे लिए यह एक पीड़ादायक और कठिन निर्णय है, लेकिन संस्था के सर्वोत्तम हित में और स्वयं को या सरकार और शर्मिदगी से बचाने के लिए मैं महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य पद से स्वैच्छा से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देना चाहता हूं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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