विज्ञान कांग्रेस की शुरुआत सोमवार से
चेन्नई, 2 जनवरी (आईएएनएस)। चेन्नई में भारतीय विज्ञान कांग्रेस का 98वां सम्मेलन सोमवार से शुरू होगा। इस दौरान न केवल शिक्षा की गुणवत्ता, विश्वविद्यालयों में वैज्ञानिक शोध की श्रेष्ठता बनाए रखने पर चर्चा होगी बल्कि रसायनशास्त्र का भविष्य, नैनो तत्व, जलवायु परिवर्तन की चुनौती और ऊर्जा सुरक्षा पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
कट्टनकुलाथुर में स्थित एसआरएम विश्वविद्यालय में आयोजित इस पांच दिवसीय सम्मलेन का उद्घाटन सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह करेंगे। इसमें देश-विदेश के वैज्ञानिक और शिक्षाविद भाग लेंगे।
भारतीय विज्ञान कांग्रेस के महासचिव के.सी. पांडे ने रविवार को संवाददाताओं से कहा, "प्रधानमंत्री उद्घाटन सत्र के दौरान 27वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस एसोसिएशन पुरस्कार वितरण भी करेंगे।"
जिन प्रमुख लोगों को पुरस्कार के लिए चुना गया है उनमें रतन टाटा (सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए), रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहलकार वी.के. सारस्वत, स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव वी.एम. कटोच, गणित विज्ञान संस्थान के परमेश्वरन संकरन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
पांडे ने कहा कि कार्यक्रम में प्रमुख रूप से इस मसले पर चर्चा होगी कि भारत को ज्ञान शक्ति से लैस बनाने के लिए विश्वविद्यालय किस तरह विज्ञान की शिक्षा में उच्च गुणवत्ता और वैज्ञानिक शोध में श्रेष्ठता को हासिल कर सकते हैं।
भारतीय विज्ञान कांग्रेस आयोजन समिति के अध्यक्ष और एसआरएम विश्वविद्यालय के कुलपति पी. सत्यनारायणन ने कहा कि अब तक 7500 प्रतिनिधियों ने अपना पंजीयन कराया है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि इसमें 9000 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। अगर ऐसा होता है तो यह अब तक का सबसे बड़ा विज्ञान कांग्रेस होगा।
एसआरएम विश्वविद्यालय में 3-7 जनवरी को होने वाले इस कार्यक्रम में 14 सत्र होंगे। इसमें छह नोबेल पुरस्कार विजेता भी शिरकत करेंगे।
विज्ञान कांग्रेस में अलग से बाल विज्ञान कांग्रेस का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें बच्चों को विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।
विज्ञान कांग्रेस का सबसे बड़ा हिस्सा प्रदर्शनी का होगा, जिसमें विभिन्न सरकारी और निजी संस्थाएं विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हुए विकास और सामाजिक योगदानों की प्रदर्शनी लगाएंगी।
विज्ञान कांग्रेस में विज्ञान संवाद सम्मेलन का अयोजन भी किया जाएगा। इसका मकसद आम लोगों में विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और विज्ञान रिपोर्टिग और लेखन का बढ़ावा देना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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