भगत का निधन, प्रधानमंत्री ने जताया शोक (लीड-1)
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भगत को अपना 'अभिन्न मित्र' बताया।
पूर्व अध्यक्ष का अपोलो अस्पताल में गुर्दे और लीवर का इलाज किया जा रहा था। वह अपने पीछे पत्नी विद्या भगत, एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं।
भगत को पांचवी लोकसभा का अध्यक्ष वर्ष 1976 में बनाया गया। उस समय देश आपातकाल के दौर से गुजर रहा था। वह इस पद पर एक वर्ष तक रहे।
भगत का जन्म सात अक्टूबर 1922 को पटना में हुआ। वह वर्ष 1993 में थोड़े समय के लिए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल और वर्ष 1993 से 1998 तक राजस्थान के राज्यपाल रहे।
भगत 17 वर्ष की आयु में एक छात्र के रूप में स्वतंत्रता संग्राम में कूद गए। स्वतंत्रता के बाद वह प्रथम लोकसभा के लिए चुने गए। वह लोकसभा में सात बार चुनकर आए।
वह पहली कांग्रेस सरकार में वित्त मंत्री के संसदीय सचिव के रूप में सेवा दी और उन्हें वर्ष 1956 में उप वित्त मंत्री बनाया गया।
वर्ष 1969 में केंद्रीय मंत्री बनाए जाने से पहले उन्होंने योजना, रक्षा और विदेश राज्य मंत्री के रूप में काम किया।
अपने शोक संदेश में प्रधानमंत्री ने उन्हें, "एक स्वतंत्रता सेनानी, महान देशभक्त और लोगों के लिए समर्पित एक वरिष्ठ राजनेता बताया।"
प्रधानमंत्री ने पीड़ित परिजनों को 'शोक संवेदना' का पत्र भेजा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मैंने अपना एक बहुत ही करीबी मित्र और महत्वपूर्ण सहयोगी खो दिया।"
लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा है कि भगत के निधन से उन्हें 'अत्यंत दुख' पहुंचा है।
उन्होंने कहा, "भगत स्वतंत्र भारत के उन नेताओं में से थे जिन्होंने आजादी के बाद देश का मार्गदर्शन किया और अपनी राजनीतिक भागीदारी से लोकतंत्र को सशक्त बनाया।"
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, "भगत के निधन से हमने भारत के एक योग्य पुत्र को खो दिया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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