नक्सलियों के विरोध से छत्तीसगढ़ में जनजीवन प्रभावित (लीड-1)

रायपुर, 2 जनवरी (आईएएनएस)। मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन की सजा के खिलाफ नक्सलियों द्वारा 'विरोध सप्ताह' शुरू किए जाने से रविवार को छत्तीसगढ़ में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस दौरान हालांकि कोई हिंसक घटना नहीं हुई।

राज्य के सीमावर्ती जंगली इलाकों में नक्सलियों ने सड़कें जाम कर दी हैं और दुकानें बंद करा दी हैं।

पुलिस के अनुसार बीजापुर और दंतेवाड़ा में नक्सली हमले की आशंका के मद्देनजर राजमार्गो पर वाहन नहीं चलाए जा रहे हैं।

रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि बस्तर, राजनांदगांव, रायपुर के कुछ हिस्से, धमतरी और दुर्ग जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। नक्सलियों के आह्वान पर दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखने का फैसला लिया।

उन्होंने कहा कि यह बड़ी राहत की बात है कि राज्य में किसी भी जगह से हिंसा की सूचना नहीं मिली है।

दो जनवरी से आठ जनवरी तक चलने वाले विरोध सप्ताह के दौरान नागरिकों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर नक्सली हमले की आशंका के मद्देनजर सरकारी इमारतों के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

संवेदनशील इलाकों में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। 1980 के दशक से ही 40,000 वर्ग किलोमीटर में फैला बक्सर क्षेत्र नक्सलियों का गढ़ बना हुआ है।

राज्य के पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन ने संवाददाताओं को बताया, "राज्य में और बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा हमेशा से चुस्त है। लेकिन विरोध सप्ताह के दौरान सुरक्षा कर्मियों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है, क्योंकि नक्सली घातक हमले की कोशिश कर सकते हैं।"

उल्लेखनीय है कि प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने बिनायक सेन, नक्सली विचारक नारायण सान्याल और कोलकाता के व्यापारी पीयूष गुहा को 24 दिसम्बर को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ विरोध सप्ताह का एलान किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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