मांगी होती सलाह तो प्रधानमंत्री को पेशकश से रोकता : प्रणब
प्रणब के मुताबिक प्रधानमंत्री पूरी लोकसभा के प्रति जवाबदेह हैं, न कि उसके किसी हिस्से के प्रति।
मुखर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसी से राय-मशविरा किए बगैर ही घोषणा की थी कि वह 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही पीएसी के समक्ष पेश होने को तैयार हैं।
मुखर्जी ने कांग्रेस पदाधिकारियों की यहां आयोजित एक बैठक में कहा कि यदि मनमोहन सिंह ने 20 दिसम्बर को बयान देने से पहले उनसे मशविरा किया होता तो वह उन्हें ऐसा न करने का सुझाव देते।
मुखर्जी ने कहा, "प्रधानमंत्री ने ऐसी घोषणा करने का निर्णय खुद लिया था। उन्होंने हम में से किसी से भी इस मुद्दे पर मशविरा नहीं किया था। लेकिन यदि उन्होंने हमसे राय ली होती तो मैं उन्हें इसके विपरीत सुझाव दिया होता, क्योंकि मैं लीक पर चलने वाला व्यक्ति हूं।"
मुखर्जी ने कहा, "मैं संसदीय नियमों का पालन करने में विश्वास रखता हूं। इस तरह की संसदीय समितियों के समक्ष मंत्री क्यों नहीं पेश होते? इसका कारण बहुत सहज है। क्योंकि मंत्री लोकसभा के प्रति, या राज्य में विधानसभा के प्रति जवाबदेह होता है।"
मुखर्जी ने कहा, "लोकसभा में वह 543 सदस्यों के प्रति जवाबदेह हैं.. वह इसलिए मंत्री बने हैं, क्योंकि लोकसभा के 543 सदस्यों में से कम से कम 272 सदस्य उनकी पार्टी का समर्थन करते हैं। वे प्रधानमंत्री का समर्थन करते हैं। उनकी जवाबदेही पूरे सदन के प्रति है, न कि सदन के किसी हिस्से के प्रति।"
ज्ञात हो कि पिछले महीने प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह पीएसी के समक्ष पेश होने का एक अभूतपूर्व प्रस्ताव दे रहे हैं। उस पीएसी के समक्ष जो नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर घोटाले की जांच कर रही है।
लेकिन प्रधानमंत्री के इस प्रस्ताव से भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नहीं पिघली थी। भाजपा, वामपंथी दलों सहित 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुई अनियमितता की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराए जाने की मांग कर रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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