जम्मू एवं कश्मीर से सुरक्षा बलों की अभी वापसी नहीं
जम्मू, 2 जनवरी (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर में राजनीतिक समूहों की मजबूत दलीलों के बावजूद राज्य से सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की कम ही संभावना है।
उच्च पदस्थ सूत्रों ने आईएएनएस से कहा कि आतंकी गतिविधियां फिर शुरू होने की आशंका है, ऐसे में राज्य सरकार जवानों को वापस बुलाए जाने का जोखिम नहीं उठाना चाहती।
उन्होंने कहा कि सूचना मिली है कि अलगाववादी और उनके समर्थक 2011 की गर्मियों में गलियों में विरोध प्रदर्शन की दूसरी पारी शुरू करने की तैयारी में हैं।
नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक बैठक में हिस्सा ले चुके वरिष्ठ अधिकारी ने यहां आईएएनएस को बताया, "ऐसे हालात में सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की कोई संभावना नहीं है। हम वही करेंगे जो सुरक्षा की दृष्टि से उचित होगा, राजनीतिक समूहोंे के विचारोंपर चलना ठीक नहीं होगा।"
अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, "यह साल यहां के लिए बहुत संटकपूर्ण बनने जा रहा है। 2010 की गर्मियों में सुरक्षा बलों पर हुए आतंकी हमलों से हमारी यह धारणा पुख्ता हुई है कि पाकिस्तान और उनसे द्वारा संपोषित आतंकी समूचे राज्य में गड़बड़ी फैलाते रहे हैं।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि समूचे राज्य में 500 से अधिक आतंकी सक्रिय हैं तथा सीमा पार से आतंकियों के नए जत्थे भी आ रहे हैं। आतंकियों की नई घुसपैठ नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा, दोनों जगहों से हो रही है। इस कारण सुरक्षा बलों की मौजूदगी और चौकसी आवश्यक है।
अधिकारी ने कहा, "हम पहले से बनी हुई व्यवस्था में तब्दीली नहीं चाहते हैं।"
सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार भीड़ नियंत्रण प्रणाली शुरू करने की तैयारी में है। राज्य पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गैर प्राणघातक हथियारों की खरीद कर रही है।
उल्लेखनीय है कि 2010 की गर्मियों में कश्मीर में स्थिति काफी गंभीर हो गई थी। उस दौरान 110 से अधिक लोग मारे गए थे, जिन में से अधिकांश युवा थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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