सुरक्षा परिषद में सुधारों का दौर साल के अंत तक : पुरी (साक्षात्कार)

वाशिंगटन, 2 जनवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरदीप सिंह पुरी को उम्मीद है कि भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता पाने में अगले साल तक सफलता मिल जाएगी क्योंकि 2011 के आखिर या 2012 के आरम्भ में सुरक्षा परिषद में सुधारों का दौर प्रारम्भ हो जाएगा। भारत को यहां 19 साल बाद अस्थायी सीट मिली है।

पुरी ने कहा, "अब हम सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता पाने को लेकर रुख भांपने को तैयार हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पुरी ने न्यूयार्क से आईएएनएस को फोन पर बताया, "अब तक के विचार विमर्श की गति से मुझे उम्मीद है कि वर्ष 2011 के आखिर या 2012 के आरम्भ तक सुरक्षा परिषद में सुधार होंगे।"

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी के इन सुझावों को गलत बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुधार शुरू होने में लम्बा वक्त लगेगा। भारत की स्थायी सदस्यता का मामला भी इन्हीं सुधारों से जुड़ा है। पुरी ने कहा कि वह कह सकते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन से हम उत्साह में हैं।

इसके अलावा पिछले साल भर में तैयार किया गया 30 पृष्ठों वाला विचार-विमर्श का मूल पाठ अंतर-सरकारी बातचीत की प्रक्रिया की वजह से घटकर दो या तीन पृष्ठ का रह जाने की सम्भावना है।

फरवरी से बातचीत शुरू होने की सम्भावना व्यक्त कर रहे पुरी ने कहा, "उसके बाद सुधार के निष्कर्ष के लिए विचार-विमर्श की आखिरी अवस्था का इंतजार करेंगे। हमें लगता है कि इस बात की काफी सम्भावना है कि वर्ष के आखिर तक सुधार शुरू हो जाएंगे"। उन्हें उम्मीद है कि बातचीत फरवरी में शुरू हो जाएगी।

पुरी ने इन रपटों पर भी ऐतराज व्यक्त किया कि निर्वाचित सदस्य के तौर पर दो साल की अवधि में भारत पर नजर रखी जाएगी, क्योंकि वह दुनिया की प्रमुख ताकतों को यह साबित करना चाहता है कि भारत सुरक्षा परिषद में भरोसेमंद स्थायी सदस्य बन सकता है और उसमें उससे जुड़ी जिम्मेदारियों का वहन करने की क्षमता है।

पुरी ने कहा, "भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां 1.1 अरब की आबादी है। उसमें राष्ट्र निर्माण का अनूठा अनुभव है। ऐसे में जो भी कहता है कि हम परिवीक्षा की स्थति में हैं या कोई अन्य किसी की निगरानी में है..मैं इस पर टिप्पणी भी नहीं करना चाहता।"

पुरी ने कहा, "तथ्य अपने-आप सामने आएंगे, तो सुरक्षा परिषद में हमारा काम शुरू होने तक इंतजार कीजिए।"

सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका और प्राथमिकताओं के बारे में पूछने पर पुरी ने कहा, "सुरक्षा परिषद को ज्यादा कारगर और प्रभावशाली बनाने के लिए भारत उसे सशक्त बनाना चाहता है।"

उन्होंने कहा, "स्पष्ट तौर पर पहली अवस्था में हमें सुरक्षा परिषद की वर्तमान कार्यसूची में हिस्सा लेना होगा, जिसका 75 प्रतिशत अफ्रीकी मामलों से सम्बद्ध है।"

पुरी ने कहा, "इसके बाद हम भारत के हित से जुड़े मसलों के सम्बंघ में भी सुरक्षा परिषद का उपयोग करने के बेहद इच्छुक हैं। हमसे सम्बद्ध, हमारे करीबी पड़ोस से सम्बद्ध बहुत से मसले हैं, जो सुरक्षा परिषद में सम्भावनाएं उपलब्ध कराते हैं।"

आतंकवाद का उदाहरण देते हुए पुरी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की समिति आतंकवाद से सम्बद्ध मामले देखती है, एक अन्य अल कायदा और तालिबान जैसे संगठनों को सूचीबद्ध करने और शांति सेना से सम्बद्ध मामले देखती है। हम इन मसलों को जारी रखने का प्रस्ताव करेंगे।

राजनयिक ने कहा है कि हो सकता है कि एक धारणा बन गई हो कि भारत दुनिया की बहुत सी समस्याओं के निराकरण के लिए सुरक्षा परिषद के इस्तेमाल के बारे में काफी सीमित है, क्योंकि हम 19 साल तक सुरक्षा परिषद में नहीं रहे हैं।

उन्होंने कहा, "भले हम चाहें या न चाहें सुरक्षा परिषद आज संयुक्त राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण हर विषय को देखती है।" उन्होंने कहा कि पिछले साल सुरक्षा परिषद ने सैकड़ों प्रस्ताव, प्रेस वक्तव्य, और मध्य पूर्व से लेकर आतंकवाद और संघर्ष के बाद शांति बहाली के प्रयासों तक के मसलों पर निष्कर्ष दस्तावेज जारी किए हैं।

उन्होंने कहा, "इसलिए कोई देश सुरक्षा परिषद का सीमित इस्तेमाल चाहे या न चाहे, यह महत्वपूर्ण नहीं है। वास्तविकता यह है कि सुरक्षा परिषद आज बहुत महत्वपूर्ण और संयुक्त राष्ट्र की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है।"

उन्होंने कहा, "यह सुरक्षा परिषद की वास्तविकता है। इसमें स्थायी सदस्यता के इच्छुक होने के नाते हमारे पास कोई विकल्प नहीं है और हम सुरक्षा परिषद के सभी कार्यों में भागीदारी की मंशा रखते हैं।"

पुरी को नहीं लगता कि भारत को सदस्यता मिलने से ईरान और म्यांमार जैसे मामलों में मतदान के स्वरूप पर असर पड़ेगा।

पुरी ने बताया कि उनकी तथा सुरक्षा परिषद के सदस्यों के दूतों की पिछले महीने ओबामा के साथ हुई मुलाकात बहुत अच्छी रही।

परिषद में भारत के चयन को भारतीय दूतों के सामूहिक प्रयासों और प्रधानमंत्री के राजनीतिक मार्गदर्शन की देन करार देते हुए उन्होंने कहा कि अगले लक्ष्य के लिए हमारी रणनीति बेहतरीन पक्ष को सामने रखना होगी और इसके लिए रणनीति तैयार की जा रही है। पुरी ने कहा कि 190 मतों में से 187 मत मिलना दर्शाता है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की ओर से भारत को मान्यता मिली है।

उन्होंने कहा, "हमने अतीत को पीछे छोड़ दिया है और हम सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए स्थिति को परखने को तैयार हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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