उल्फा अध्यक्ष राजखोवा रिहा, जनसभाओं को किया सम्बोधित (राउंडअप)
गुवाहाटी, 1 जनवरी (आईएएनएस)। प्रतिबंधित संगठन, युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के अध्यक्ष, अरविंद राजखोवा को शनिवार तड़के जेल से रिहा कर दिया गया। राजखोवा ने रिहाई के बाद अपने घर शिवासगर जिला जाते हुए रास्ते में छोटी-बड़ी कई जनसभाओं को सम्बोधित किया।
जेल से रिहा होने के बाद राजखोवा ने कम से कम 10 बैठकों को सम्बोधित किया। गलियों में उन्हें सुन रहे लोगों ने 'उल्फा जिंदाबाद' के नारे लगाए। इस मौके पर लोगों ने उन का फूलों और पारंपरिक गमछा से स्वागत किया।
दारंग जिले के सिपाझार में एक बैठक को सम्बोधित करने के बाद राजखोवा ने आईएएनएस को बताया, "मैं लोगों की प्रतिक्रिया देखकर रोमांचित हूं।"
आतंकवाद निरोधी एक विशेष न्यायालय ने गुरुवार को राजखोवा को जमानत दी थी, क्योंकि सरकारी वकील ने राजखोवा की जमानत याचिका का विरोध नहीं किया था।
राजखोवा ने जेल से बाहर कदम रखने के तत्काल बाद संवाददाताओं से कहा, "हम सरकार के साथ बिना शर्त शांति वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके बारे में औपचारिक निर्णय जेल में बंद सभी नेताओं की रिहाई के बाद हमारी कार्यकारिणी की बैठक में लिया जाएगा।"
बांग्लादेश के रैपिड एक्शन बटालियन के जासूसों ने राजखोवा (54) को ढाका से गिरफ्तार किया था। गत वर्ष दिसम्बर में उन्हें भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया था। राजखोवा गत एक वर्ष से गुवाहाटी के केंद्रीय जेल में बंद थे।
जेल के बाहर राजखोवा के परिवार और मित्रों सहित भारी भीड़ ने उनका स्वागत किया।
राजखोवा ने कहा, "मैं इस अवसर पर सिटिजन फोरम (एक नागरिक संगठन, जिसने शांति वार्ता का मार्ग प्रशस्त करने के लिए उल्फा नेताओं की रिहाई की वकालत की थी) को, जिसने हमारी रिहाई के लिए दबाव बनाया और सरकार को भी, जिसने जनभावना का सम्मान करते हुए हमारी रिहाई में सहयोग किया, धन्यवाद देना चाहूंगा।"
राजखोवा ने आगे कहा, "लेकिन मैं सरकार से यह भी अपील करना चाहूंगा कि वह जेल में बंद हमारे दो साथियों (स्वयंभू विदेश सचिव) साशा चौधरी और (वित्त सचिव) चित्रबन हजारिका को तत्काल रिहा कर दे। और साथ ही अनूप चेतिया (उल्फा महासचिव, जो कि इस समय 1997 से ही बांग्लादेश में कैद हैं) का भारत आगमन सुनिश्चित कराए ताकि वह भी शांति प्रक्रिया में हिस्सा ले सकें।"
राजखोवा ने कहा, "लेकिन मैं यह बहुत स्पष्ट तौर पर कहना चाहूंगा कि शांति प्रक्रिया के कारण उल्फा में न तो किसी तरह की दरार आएगी और न कोई विभाजन होगा।"
उल्लेखनीय है कि राजखोवा के साथ ही उनकी पत्नी कावेरी और उनके दो बच्चों को भी हिरासत में लिया गया था, लेकिन पुलिस ने परिवार पर कोई आरोप नहीं लगाया था और उसे बरी कर दिया था। राजखोवा का परिवार तभी से पूर्वी असम के शिवसागर जिले के लाकवा में स्थित अपने पैतृक घर में रह रहा है।
मई महीने से जमानत पर रिहा होने वाले उल्फा नेताओं में राजखोवा छठे नेता हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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