आतंकियों के 'स्लीपिंग सेल' का पनाहगाह मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश का मालवा क्षेत्र पिछले कुछ वर्षो से प्रतिबंधित संगठन इस्लामिक स्टूडेंट मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का गढ़ बना हुआ है। यही कारण है कि इंदौर के अलावा उज्जैन, धार, खंडवा, बुरहानपुर में इस संगठन से जुड़े लोगों की गतिविधियां समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
पिछले तीन साल की सिमी से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलता है कि इंदौर के एक मकान से सिमी के सरगना सफदर नागौरी सहित 13 लोगों की एक साथ गिरफ्तारी की गई थी। इन लोगों के पास से चौंकाने वाले दस्तावेज मिले थे। तब इस बात का खुलासा हुआ कि सिमी से जुड़े लोगों की इस इलाके में गहरी घुसपैठ है। यही नहीं इंदौर के समीप चोरल के जंगल में सिमी के लोगों द्वारा युवाओं को प्रशिक्षण देने का मामला सामने आया था।
उज्जैन का उन्हैल ऐसा इलाका है जहां के कई युवा सिमी के लिए काम करने के आरोप मे पकड़े जा चुके हैं। सूत्रों का दावा है कि सिमी के सरगना ने यहां के कई युवाओं को बहकाने का काम किया है।
सिमी से जुड़े लोगों ने ही आतंकवाद निरोधक दस्ते में काम कर चुके एक आरक्षक सहित तीन लोगों की खंडवा में गोली मारकर हत्या की थी। पुलिस इस हत्याकांड को अंजाम देने वालों को अब तक नहीं पकड़ पाई है। इंदौर के पुलिस महानिरीक्षक संजय राणा ने आईएएनएस को बताया कि इस हत्याकांड के सिलसिले में पुलिस के हाथ महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं।
सिमी के गढ़ रूप में पहचान बना चुके मालवा में पुलिस की सतर्कता हमेशा रहती है। राणा ने बताया कि सिमी के कई सदस्यों को पहले पकड़ा जा चुका है।
ज्ञात हो कि पिछले दिनों भोपाल में सिमी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव मुनीर देशमुख को पकड़ा गया और अब 31 दिसम्बर की रात जम्मू एवं कश्मीर के दो आतंकवादियों शौकत अहमद हकीम और मेहराजुद्दीन शेखगुजरी को गिरफ्तार किया गया।
आतंकी गतिविधियों में शामिल अपराधियों का मध्यप्रदेश में पकड़ा जाना और उनके द्वारा किसी तरह की वारदात को अंजाम न देने से एक बात जाहिर होती है कि आतंकी अपना वक्त बीताने के लिए यहां आते हैं। मालवा में काम करने वाले 'स्लीपिंग सेल' आतंकी गतिविधियों की रणनीति भी यहीं बनाते हैं। यह बात कई बम धमाकों से जाहिर भी हो चुकी है। पुलिस अधिकारी इसे मानते हैं लेकिन खुले तौर पर इसे स्वीकार नहीं करते।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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