पाकिस्तानी सेना प्रमुख को समझा नहीं पाया है अमेरिका
वाशिंगटन, 1 जनवरी (आईएएनएस)। पकिस्तान में स्थित तालिबान के सुरक्षित ठिकानों पर हमला करने के लिए पाकिस्तानी सेना प्रमुख, अशफाक परवेज कयानी को समझाने के अमेरिकी अधिकारियों के सारे प्रयास अभी तक निर्थक साबित हुए हैं। अमेरिकी खुफिया का मानना है कि कयानी निकट भविष्य में अपना दिमाग बदलने वाले नहीं लगते।
देश की सुरक्षा रणनीति पर राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री से अधिक अधिकार कयानी का है। कयानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, अमेरिकी सैन्य कमांडरों और वरिष्ठ राजनयिकों के निजी आग्रहों का विरोध किया है।
प्रमुख अमेरिकी समाचार पत्र 'वाशिंगटन पोस्ट' में प्रकाशित रपट के अनुसार अमेरिकी प्रशासन, पाकिस्तान के अंदर स्थित तालिबान के ठिकानों का सफाया, अफगानिस्तान युद्ध में एक प्रमुख सफलता मानता है। लेकिन वह ऐसा करने के लिए कयानी को अभी तक राजी नहीं कर पाया है।
अधिकारियों का कहना है कि तमाम आग्रहों के बावजूद कयानी अमेरिकी मंशा पर भरोसा नहीं करते और इसके लिए अपना सर्वोत्तम प्रयास कर रहे हैं कि अमेरिका की अफगानिस्तान रणनीति विफल हो जाए। कई मायनों में कयानी पाकिस्तान द्वारा खड़ी की गई समस्या के अवतार हैं।
जहां एक ओर ओबामा प्रशासन तालिबान को शत्रु के रूप में देखता है और उन्हें जल्द से जल्द समाप्त करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान लम्बे समय से तालिबान को अपनी पश्चिमी सीमा की भारत से हिफाजत में उपयोगी मानता है।
अखबार ने ओबामा प्रशासन के एक अधिकारी के हवाले से कहा, "कयानी दक्षिण एशिया में पैदा हालात की समाप्ति के बारे में बात करना चाहते हैं। जबकि अमेरिकी जनरल अगले ड्रोन हमले के बारे में बात करना चाहते हैं।"
ओबामा प्रशासन ने कयानी द्वारा 2009 और 2010 में स्वात घाटी में और दक्षिणी वजीरिस्तान में घरेलू आतंकियों के खिलाफ चलाए गए अभियान की प्रशंसा की है और पाकिस्तान के लिए अपनी सैन्य सहायता और आर्थिक सहायता आश्चर्यजनक रूप से बढ़ा दी है। लेकिन अमेरिका इस बात से निराश हो चुका है कि कयानी ने उत्तरी वजीरिस्तान में अफगानी तालिबान और अलकायदा के ठिकानों पर जमीनी हमला नहीं किया है।
कयानी ने वादा किया है कि जब उनके पास पर्याप्त मात्रा में सैनिक उपलब्ध होंगे, तब वह कार्रवाई करेंगे। लेकिन उन्होंने इस तरह का कोई संकेत नहीं दिया है कि वह दिन कब आएगा। पाकिस्तान की पांच लाख सेना में से अधिकांश को भारत से लगी पूर्वी सीमा पर तैनात किया गया है।
इस बात की भी खबर है कि कयानी अमेरिकी कूटनीतिक संदेशों के विकिलीक्स खुलासों से व्यथित हैं, जिनमें से कुछ में कयानी को अमेरिकियों को दूर का मित्र करार दिया गया है। संदेशों में यह भी कहा गया है कि कयानी अपने काम से अधिक पाकिस्तानी राजनीति में अधिक रुचि रखते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications