वेतन से वंचित भारतीय विधवा की बेटी ने आत्महत्या की

तमिलनाडु के तंजावूर की रहने वाली विधवा लता षणमुगम (37) एक मलेशियाई परिवार के यहां काम करती थी। वह 2009 में कुआलालम्पुर गई थी। उसे प्रति माह 750 आरएम (243 डॉलर) वेतन का वादा किया गया था।

तमिल दैनिक पत्र 'मक्कल ओसै' ने यहां कहा है कि नियोक्ता ने उसे चार महीने का वेतन नहीं दिया। नियोक्ता ने कहा कि उसे महिला की इम्प्लायमेंट एजेंसी को 5,000 आरएम (1,621 डॉलर) का भुगतान करना है।

लता ने नौकरी छोड़ दी और तमान मालूरी में एक रेस्तरॉ में बतौर हेल्पर काम करने लगी। उसके नए नियोक्ता ने पहले महीने का तो वेतन दिया, लेकिन उसके बाद कथित रूप से छह महीने तक वेतन देने से इंकार कर दिया।

लता ने कहा कि उसने रेस्तरॉ में आठ महीने तक काम किया। उसके बाद उसके नियोक्ता ने उसे 2,200 आरएम (648 डॉलर) का भुगतान किया और उसे काम से हटा दिया।

इस बीच चेन्नई में पढ़ाई कर रही उसकी सबसे बड़ी बेटी (18 वर्ष) स्कूल की फीस के लिए 10,000 रुपये भेजने का आग्रह करती रही। उसकी दो अन्य बेटियां (15 वर्ष और सात वर्ष) अपने गांव के स्कूल में पढ़ाई करती हैं।

लता ने कहा कि उसकी बेटी ने स्कूल के सूचना पट्ट पर फीस जमा न करने वालों की सूची में अपना नाम आने के बाद शर्म के मारे आत्महत्या कर ली।

लता ने कहा कि एक टैक्सी चालक ने एक सामाजिक कार्यकर्ता से मिलाने में उसकी मदद की है। वह सामाजिक कार्यकर्ता उसकी भारत वापसी का बंदोबस्त कर रहा है।

ज्ञात हो कि मलेशिया में 21 लाख भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं। इनमें से अधिकांश तमिल हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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