खेती के नए विकल्प तलाश रहा है हरियाणा
चंडीगढ़, 1 जनवरी (आईएएनएस)। हरित क्रांति में प्रमुख भूमिका निभाने वाला हरियाणा अब बागबानी, फूलों की खेती, सब्जियां उपजाने, मछलीपालन, आदि के नए विकल्पों की तलाश कर रहा है।
आम खेतीबाड़ी से हटकर इन नए क्षेत्रों में कदम रखने वाले किसानों का कहना है कि इनमें अधिक लाभ है।
कुरुक्षेत्र के एक किसान धनपत सिंह ने आईएएनएस से कहा कि किसानों को बागवानी, मछली पालन, फूलों की ख्ेाती आदि के उत्पाद को बेचने के बाद भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता है, क्योंकि इनकी खरीदारी अधिकतर संगठित क्षेत्र की कम्पनियों द्वारा की जाती है।
इन नए क्षेत्रों में कदम रखने के बावजूद हरियाणा और इसके पड़ोसी राज्य देशभर में गेहूं और धान की कुल पैदावार में सर्वाधिक योगदान कर रहे हैं।
बागवानी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से बागवानी को बढ़ावा मिलने के बाद यहां बागवानी के अंदर आने वाला क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है और अभी यह कुल सींचित क्षेत्र का 5.64 फीसदी हो गया है।
उन्होंने कहा कि 2009-10 में सब्जी उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 30 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है और इसका उत्पादन 40 लाख टन पार कर चुका है।
अधिकारी ने इसी तरह फल, सब्जी, मसाले, आदि का उत्पादन क्षेत्र बढ़ने और इनका रिकार्ड उत्पादन होने की बात कही।
इसी तरह करनाल और आसपास के किसानों में सामान्य खेती की जगह मछली पालन की प्रवृत्ति बढ़ रही है और उन्होंने अपने खेत में तालाब बना लिए हैं। हरियाणा ने मछली पालन में 12.5 फीसदी की विकास दर हासिल की है, जो आठ फीसदी की राष्ट्रीय विकास दर से काफी अधिक है।
हरियाणा सरकार के मछली पालन विभाग ने 50 लाख रुपये की लागत से राज्य में मछली पालन में प्रशिक्षण देने की योजना भी शुरू की है।
राज्य में अनुसूचित जाति के लोगों को मछली पालन और इसका कारोबार करने के लिए वित्तीय सुविधाएं भी दी जा रही हैं। इस साल अब तक कुल 450 लोगों ने इन सुविधाओं का लाभ उठाया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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