नेपाली माओवादियों का भारत में प्रशिक्षण मिलने से इंकार

नेपाल के पूर्व विद्रोहियों ने नेपाल के पूर्व सेनाधिकारी बिबेक शाह को अपना आरोप साबित करने की चुनौती दी। शाह ने हाल में एक संस्मरण में लिखा था कि भारतीय सेना ने नेपाली माओवादियों को नेपाल में राजतंत्र को समाप्त करने के लिए प्रशिक्षण दिया था।

माओवादियों के मुखपत्र जनादिशा डेली में नेपाल के माओवादी सांसद और पूर्व विदेश मंत्री चंद्रप्रकाश गजुरेल के हवाले से कहा गया है कि यह पूरी तरह गलत है। यह सही नहीं हो सकता है।

उन्होंने शाह को आरोप साबित करने की चुनौती दी।

गजुरेल ने दशक भर लंबे चले गृह युद्ध के बारे में लिखा है कि माओवादियों ने भारत के नेपाल में हस्तक्षेप के खिलाफ युद्ध करने की कसम खाई थी।

भला कोई देश अपने खिलाफ युद्ध छेड़ने वाले को प्रशिक्षण कैसे दे सकता है।

माओवादियों के प्रवक्ता और सांसद दीनानाथ शर्मा ने कहा कि उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है।

भारत ने भी इस आरोप को गलत बताया है।

नेपाल के पूर्व शासक बिरेंद्र और उसके बाद शासक ज्ञानेंद्र के काल में सैन्य सचिव रहे जनरल शाह ने बुधवार को एक संस्मरण जारी किया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें पद से इसलिए हटाया गया था, क्योंकि वे इस रिपोर्ट पर जांच कर रहे थे कि माओवादियों को भारत के उत्तराखंड राज्य के चकरौता में प्रशिक्षण दिया गया था।

'मैले देक्के को दरबार' (मैंने अपनी आंखों से दरबार को जैसा देखा) नामक इस पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि बिरेंद्र की हत्या का एक कारण हथियारों की होड़ भी हो सकती है। उन्होंने लिखा है कि बिरेंद्र जर्मन युद्धक राइफल खरीदना चाहते थे, जबकि भारत नहीं चाहता था कि नेपाल के पास इस तरह का अत्याधुनिक हथियार हो।

भारतीय अधिकारियों ने हालांकि इस आरोप को बेतुका बताया है।

माओवादियों और भारत के खंडन पर जनरल शाह की अभी तक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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