मलेरिया के टीके का हो रहा है विकास
के. एस. जयरामन
बेंगलुरू, 31 दिसम्बर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों ने जीन संवर्धित स्टार्च का विकास किया है, जो चूहों को मलेरिया से बचाने में सक्षम साबित हुआ है। यदि यह प्रयोग मानवों पर भी सफल हुआ, तो जल्दी ही एक खा सकने वाले मलेरिया के टीके का विकास सम्भव हो जाएगा।
चूहों पर यह प्रयोग फ्रांस की दो प्रयोगशालाओं में हुआ है। फ्रांस और अमेरिकी वैज्ञानिकों के एक दल ने एक जीन संवर्धित स्टार्च तैयार किया जिसे टैबलेट के रूप में खाया जा सकता है। इस स्टार्च का निर्माण उन्होंने एक प्रकार के हरे शैवाल से किया, जिसके जीन में वैज्ञानिकों ने पहले से मलेरिया को रोक सकने लायक बदलाव कर दिया था।
इस जीन संवर्धित शैवाल से तैयार स्टार्च को उन्होंने उन चूहों को खिलाया, जिन्हें मलेरिया के परजीवियों से संक्रमित कर दिया गया था। वैज्ञानिकों ने पाया कि चूहों को मलेरिया नहीं हुआ।
वैज्ञानिकों ने ऑनलाइन विज्ञान पत्रिका 'प्लोएस वन' पर इस प्रयोग के ब्योरे में लिखा कि इससे बच्चों में मलेरिया के सुरक्षित टीकाकरण के विकास में मदद मिलेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर साल मलेरिया से करीब 10 लाख मौतें होती हैं, जिसमें से अधिकतर मरने वाले बच्चे होते हैं।
भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरू के वैज्ञानिक गोविंदराजन पद्मनाभन ने कहा कि अभी हमें देखना है कि यह प्रयोग मानव पर सफल होता है या नहीं।
वैज्ञानिकों ने लिखा है कि उनका प्रयोग यदि सफल होता है तो जिस प्रकार उन्होंने मलेरिया से बचाने वाले स्टार्च के विकास के लिए शैवाल के जीन में बदलाव किया, उसी प्रकार खाद्य फसलों के जीन में भी बदलाव किया जा सकता है।
इससे बच्चों को एकसाथ पोषण और मलेरिया का टीका दोनों मिलने का रास्ता तैयार हो जाएगा।
उल्लेखनीय है कि अभी तक मलेरिया की रोकथाम के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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