कृष्णा जल विवाद पर फैसले से आंध्र संतुष्ट नहीं
हैदराबाद, 31 दिसम्बर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को कहा कि कृष्णा जल विवाद पर न्यायाधिकरण के फैसले से वह संतुष्ट नहीं है, क्योंकि अतिरिक्त जल पड़ोसी राज्य कर्नाटक और महाराष्ट्र को देने की बात कही गई है।
राज्य के राजस्व मंत्री रघुवीर रेड्डी ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार पूरी रिपोर्ट का अध्ययन करेगी तथा कोई निर्णय लेने से पहले कृषि विशेषज्ञों, अभियंताओं एवं वकीलों की राय लेगी।
बृहत सिंचाई मंत्री पी. सुदर्शन रेड्डी ने गुरुवार को कहा था कि सरकार तीन महीने के भीतर न्यायाधिकरण में अपील करेगी तथा स्थिति स्पष्ट करने की मांग करेगी।
मुख्य विपक्षी दल तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) ने हालांकि शुक्रवार को राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह राज्य के साथ हुए अन्याय की शिकायत केंद्र सरकार से करने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को लेकर नई दिल्ली चले।
तेदेपा प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को न्यायाधिकरण के फैसले की समीक्षा के लिए शीर्ष नेताओं के साथ बैठक की। पार्टी ने राज्य के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन करने का निर्णय लिया।
नायडू ने कहा कि राज्य को व्यापक राष्ट्रीय नदी जल साझेदारी नीति का अभाव तथा राज्य सरकार के ढुलमुल रवैए का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
ज्ञात हो कि कृष्णा डेल्टा परिरक्षण समिति ने भी राज्य सरकार से अपील की है कि वह न्यायाधिकारण के फैसले को गंभीरता से ले। समिति का कहना है कि इस फैसले से कृष्णा डेल्टा क्षेत्र में उपजने वाली दूसरी फसल पर सवालिया निशान लग गया है। समिति ने राज्य के सभी सांसदों से कहा कि वे राज्य के साथ हुए अन्याय के विरुद्ध संयुक्त आंदोलन छेड़ें।
उल्लेखनीय है कि न्यायाधिकरण ने गुरुवार को दिए अपने फैसले में कृष्णा नदी के जल में से आंध्र प्रदेश को 1,001 टीएमसी फुट, कर्नाटक को 911 टीएमसी फुट तथा महाराष्ट्र को 666 टीएमसी फुट हिस्सा देने का निर्देश दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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