मृत्युदंड का सामना कर रहे भारतीयों ने कहा, मुआवजा नहीं देंगे (लीड-3)

मृतक मिस्री नजीर खान के परिवार के प्रतिनिधि ने गुरुवार को शारजाह अपीली अदालत में कहा था कि यदि आरोपी, हत्या का मुआवजा देने को राजी हो जाएं तो पीड़ित परिवार समझौता करने को तैयार है।

प्रतिनिधि ने अदालत से कहा, "पीड़ित परिवार 'दिया' सहित मुआवजा चाहता है। यदि बचाव पक्ष मुआवजा देने से इंकार करे तो सभी को मौत की सजा दे दी जाए।"

समाचार पत्र 'द गल्फ टुडे' में प्रकाशित रपट के अनुसार अधिवक्ता मोहम्मद सलमान के नेतृत्व वाले बचाव दल ने समझौते से इंकार करते हुए इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, क्योंकि आरोपियों का दोष अभी साबित नहीं हुआ है।

अदालत ने बचाव पक्ष से कहा कि वह इस प्रस्ताव पर फिर से विचार करे और मामले की सुनवाई के लिए 17 फरवरी, 2011 की तारीख तय कर दी।

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायमूर्ति अब्दुल्ला यूसुफ अल शम्सी की अध्यक्षता वाले न्यायमूर्ति अहमद लबीब और सरकारी वकील मुस्तफा अल बारोडी के अदालती दल ने समझौता पत्र, बचाव पक्ष के वकीलों को सौंप दिया। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि वह इस प्रस्ताव पर बचाव पक्ष के परिजनों से और दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के एक प्रतिनिधि से चर्चा करेंगे।

बचाव पक्ष की एक सदस्य, बिंदू चेत्तुर ने 'द गल्फ टुडे' के साथ बातचीत में कहा कि गुरुवार को अदालत में पेश हुए दो जांचकर्ताओं के साथ जिरह की गई और उनसे मिले जवाब से इस मामले में बचाव पक्ष मजबूत हुआ है।

बचाव पक्ष ने न्यायाधीश से आग्रह किया कि वह बाकी बचे दो जांच अधिकारियों को भी अदालत में तलब करे। बचाव पक्ष ने अदालत से यह भी आग्रह किया कि वह उन हथियारों को पेश करने का आदेश जारी करे, जिनका इस्तेमाल मारपीट में किया गया था और उन्हें बाद में शारजाह पुलिस ने जब्त कर लिया था।

बिंदू चेत्तुर ने कहा कि जब तक अपराध में इस्तेमाल किया गया हथियार अदालत में पेश नहीं कर दिया जाता, तब तक सबूत पूरा नहीं होता। उन्होंने कहा, "अपराध, अपराध के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली वस्तु और आरोपी के बीच सम्बंध स्थापित करना अनिवार्य है। जब तक यह अदालत में साबित न हो जाए आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।"

चेत्तुर ने यह भी कहा कि प्रमुख आरोपी राजू की अनुपस्थिति एक अलग मुद्दा है, जिसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "हम निश्चितरूप से इस मुद्दे को उठाएंगे कि आखिर राजू को देश से बाहर जाने की अनुमति क्यों दी गई।"

ज्ञात हो कि इन सभी भारतीयों को शारजाह की एक अदालत ने, गैर कानूनी शराब के कारोबार को लेकर हुई लड़ाई के बाद एक पाकिस्तानी नागरिक, मिस्री नजीर खान की जनवरी 2009 में हत्या करने और तीन अन्य को घायल करने के आरोप में मार्च 2010 में मौत की सजा सुनाई थी। इनमें से 16 व्यक्ति पंजाब के हैं और एक हरियाणा का है। हत्या की घटना शारजाह के अल साजा इलाके में घटी थी।

दुबई स्थित भरतीय वाणिज्य दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा, "अगली सुनवाई 17 फरवरी को है। हमारे वकील इसकी तैयारी कर रहे हैं।"

दूसरी ओर भारत में आरोपियों के परिजनों और उनके बचाव में जुटे पंजाब स्थित एक गैर सरकारी संगठन ने रिहाई के एवज में मुआवजा देने से इंकार कर दिया है।

गैर सरकारी संगठन, लायर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल (एलएफएचआरआई) के एक प्रतिनिधि, नवकिरन सिंह ने शुक्रवार को आईएएनएस से कहा, "भारतीय युवकों की रिहाई के लिए मुआवजा देने की कोई आवश्यकता नहीं है। मुआवजा उन मामलों में दिया जाता है, जहां दोष सबूत के जरिए साबित हुआ हो। लेकिन इस मामले में वे बेगुनाह हैं और शारजाह पुलिस को उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है।"

सिंह ने कहा, "हम उन्हें निर्दोष साबित कर स्वदेश वापस लाना चाहते हैं। लेकिन एक बार यदि हमने मुआवजा दे दिया तो यह अपने आप उन्हें दोषी साबित कर देगा। इन 17 व्यक्तियों के अलावा यूएई की जेलों में कई अन्य बेगुनाह भारतीय भी कैद हैं और हम सभी के लिए मुआवजा नहीं चुका सकते।"

शारजाह की जेल में कैद नवजोत सिंह (27) के भाई जॉनी सिंह ने आईएएनएस को बताया, "मैंने नवजोत से बात की है और वह इस मामले को लेकर बहुत खुश है। वह किसी भी तरह का मुआवजा देने के बिल्कुल खिलाफ है। उसने मुझे बताया था कि वह अच्छी हालत में है और जल्द रिहाई के प्रति आशावान है।"

इस मामले में शारजाह की जेल में कैद एक अन्य व्यक्ति सुखजिंदर सिंह के चाचा शेर सिंह ने कहा, "मेरा भतीजा बेगुनाह है, फिर उसकी रिहाई के लिए हम मुआवजा क्यों दें। हम चाहते हैं कि इन सभी 17 बेगुनाहों की जिंदगियां बचाने के लिए पंजाब और केंद्र की दोनों सरकारें हस्तक्षेप करें।"

दोषी ठहराए गए सभी व्यक्तियों की उम्र 17 से 30 वर्ष के बीच है और सभी निम्न मध्य वर्ग परिवारों से हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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