तेलंगाना पर समिति ने सौंपी रिपोर्ट, 6 जनवरी को होगी सार्वजनिक (राउंडअप)
इस बीच अलग राज्य की मांग करने वाले आंध्र प्रदेश के राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार से अपने नौ दिसम्बर 2009 के बयान पर कायम रहने का अनुरोध किया है।
दलों ने सरकार से समिति की सिफारिशों पर विचार न करते हुए पृथक राज्य के गठन के लिए संसद में विधेयक लाने की मांग की है। उधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि वह नया राज्य बनाए जाने के पक्ष में है।
तेलंगाना आंदोलन का नेतृत्व करने वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने कहा कि केंद्र सरकार को आंध्र प्रदेश से एक पृथक राज्य का गठन करने के लिए संसद में विधेयक लाना चाहिए।
टीआरएस नेता एवं विधायक के. तारकरामा राव ने तेलंगाना भवन में पत्रकारों से कहा, "केंद्र सरकार को श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट पर विचार न करते हुए संसद के आगामी सत्र में एक विधेयक लाना चाहिए।"
केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने गुरुवार को कहा कि आंध्र प्रदेश के प्रमुख आठ राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक के बाद श्रीकृष्ण रिपोर्ट छह जनवरी को सार्वजनिक की जाएगी।
चिदम्बरम के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए टीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव के पुत्र राव ने कहा कि रिपोर्ट में चाहे जो भी सिफारिश की गई हो, केंद्र सरकार को इस पर विचार न करते हुए अपनी तेलंगाना की प्रतिबद्धता पर कायम रहना चाहिए।
राव ने गत वर्ष नौ दिसम्बर को चिदम्बरम द्वारा दिए गए उस बयान की याद दिलाया जिसमें उन्होंने कहा था कि पृथक तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
तारकरामा राव ने कहा कि क्षेत्र में लोग एक अलग राज्य की प्रतीक्षा में हैं। उन्होंने दावा किया कि करीमनगर जिले में कुछ लोग अलग राज्य के गठन के लिए सरकार द्वारा तुरंत कदम उठाए जाने की मांग को लेकर पहले ही भूख हड़ताल शुरू कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि रिपोर्ट के मद्देनजर चिदम्बरम की ओर से बुलाई जाने वाली बैठक के लिए कांग्रेस और मुख्य विपक्षी पार्टी तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) ने अपने प्रतिनिधियों को चुनने का काम शुरू कर दिया है।
दिल्ली में भाजप नेता सुषमा स्वराज ने गुरुवार को कहा कि उनकी पार्टी आंध्र प्रदेश से एक नया राज्य बनाने का समर्थन करती है।
सोशल नेटवर्किं ग साइट 'ट्विटर' पर सुषमा ने लिखा है, "हम पृथक तेलंगाना राज्य के गठन को लेकर काफी उत्सुक हैं।"
उल्लेखनीय है कि पृथक तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर इसके समर्थन और विरोध में हुए प्रदर्शनों के बाद राज्य के हालात सहित अन्य मामलों का अध्ययन करने के लिए श्रीकृष्ण समिति का गठन गत फरवरी महीने में किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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