चवन्नी के दिन लदे, अठन्नी होगी सबसे छोटा सिक्का
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि अब लेन-देन में सबसे कम मूल्य का सिक्का 50 पैसे का होगा। इसे बोलचाल की भाषा में अठन्नी कहा जाता है।
बयान में कहा गया कि 30 जून, 2011 से चवन्नी और उससे छोटे मूल्य के सभी सिक्के -एक पैसा, दो पैसे, तीन पैसे, पांच पैसे, 10 पैसे, 20 पैसे और 25 पैसे- स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
छोटे मूल्य वाले इन सिक्कों की अहमियत पहले ही समाप्त हो चुकी है। सरकार को इन सिक्कों को ढालने में इसकी कीमत से अधिक खर्च हो रहा था।
मंत्रालय ने कहा कि इन सिक्कों की बाजार से वापसी की प्रक्रिया के बारे में भारतीय रिजर्व बैंक अलग से अधिसूचना जारी करेगा।
बयान में कहा गया कि तय तिथि के बाद सभी लेखा-बही, कर की गणना, वस्तुओं और सेवाओं की कीमत तय करते वक्त संपूर्ण मूल्य को 50 पैसे और पूरे रुपये में ही दर्शाया जाएगा।
देश के 50 पैसे के सिक्के की कीमत अमेरिका के एक सेंट के बराबर होती है।
पुराने दिनों को याद करते हुए 88 वर्षीय पी. रामासुब्रह्मण्यम ने आईएएनएस से कहा कि 25 पैसे के सिक्के को चार आना कहा जाता था। 1940 में चार आने के दो सिक्के से घर के एक दिन का खर्च चल जाता था।
अखिल बग्गा (62 वर्ष) ने कहा कि स्कूल के दिनों में उन्हें जेब खर्च के रूप में 25 पैसे मिला करते थे। अब इसकी कोई कीमत नहीं है। कितना कुछ बदल गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications