शब्दों के वार में उलझे चिदम्बरम, बुद्धदेव
कोलकाता, 30 दिसम्बर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के नाम केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम की हाल में लिखी चिट्ठी में उपयोग किए गए एक विदेशज शब्द पर राजनीति गरमा गई है।
चिदम्बरम ने पत्र में लिखा था, 'इस बात के प्रमाण मिले हैं कि हरमद कैंप अधिकतर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कर्यालयों और माकपा के स्थानीय कार्यकर्ता के घरों में चलते हैं। यह चिंता की बात है कि कार्यकताओं को हथियार दिए गए हैं।'
मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य 'हरमद' शब्द के इस्तेमाल से चिढ़ गए हैं। उन्होंने इसका अर्थ 'किराए का हत्यारा' लगाया है और चिदम्बरम को कड़े शब्दों में लिखा कि वे तृणमूल कांग्रेस के नेताओं द्वारा गढ़े शब्द का बिना अर्थ जाने इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्होंने माकपा कार्यकताओं को हरमद (किराए का हत्यारा) बताने के लिए कड़ी आपत्ति जताई।
हरमद शब्द की उत्पत्ति स्पेनिश भाषा के शब्द 'अर्मडा' से हुई है। स्पेन मे 16वीं शताब्दी में अर्मडा शब्द उन जंगी जहाजों के बेड़ों के लिए इस्तेमाल किया गया था, जिन्हें इंग्लैंड को जीतने के लिए भेजा गया था।
बांग्ला भाषा में हरमद शब्द का उपयोग 17 शताब्दी के पुर्तगाली लुटेरों के लिए किया जाता है, जो गांवों को लूटते थे और गुलामों के रूप में बेचने के लिए गांवों से लोगों को उठा ले जाते थे।
हाल में हरमद शब्द का इस्तेमाल वाम राजनीति का विरोध करने वाले कुछ अखबारों द्वारा माकपा समर्थित गुंडों के लिए किया गया था, जिसके बाद तृणमूल कांग्रेस माकपा के विरुद्ध खुलकर इस शब्द का इस्तेमाल कर रही है।
ममता बनर्जी ने इस विवाद पर चिदम्बरम का साथ देते हुए कहा कि हरमद का मतलब होता है 'डाकू'। जो हथियार लेकर चले, लोगों की हत्या करे और महिलाओं की इज्जत से खिलवाड़ करे उसे और क्या कहा जाएगा।
वाम मोर्चे की सहयोगी पार्टियां हालांकि इस मुद्दे पर विरोध की मुद्रा में हैं।
चिदम्बरम के हरमद शब्द के इस्तेमाल से सिर्फ राजनीतिज्ञ ही नहीं, बल्कि भाषाविद और शिक्षाविद के बीच भी शब्द और उसके अलग अलग तरीकों से उपयोग और उसके अर्थ को लेकर बहस छिड़ गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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