पार्टी के दबाव के आगे झुकना पड़ा जोशी को

जोशी के रुख से पार्टी की जेपीसी की मांग को पिछले कुछ दिनों से पलीता लग रहा था। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुए घोटाले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग को लेकर भाजपा ने संसद का शीतकालीन सत्र नहीं चलने दिया।

संसद का सत्र खत्म होने के बाद पार्टी इस मसले पर सड़कों पर उतर गई लेकिन सरकार इसकी जांच जेपीसी से कराने को तैयार नहीं हुई। बतौर लोक लेखा समिति (पीएसी) अध्यक्ष जोशी ने भी यह कहकर कि पीएसी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट से आगे तक भी जांच कर सकती है, भाजपा सहित समूचे विपक्ष के आक्रमण की धार कुंद कर दी थी।

जोशी के इस रवैये से भाजपा को अपने सहयोगी दलों के समक्ष तक सफाई देनी पड़ी थी। अलबत्ता, जेपीसी मांग पर जोशी के रवैये से मुश्किलों में फंसी पार्टी ने पहले तो उन्हें इस मामले में पूरी तरह अलग-थलग कर दिया। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज को ट्वीट कर यह कहना पड़ा कि पीएसी का दायरा सीमित है और वह जवाबदेही सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं है। इसके बाद पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने भी यही राग अलापा।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी की फजीहत होते देख अध्यक्ष नितिन गडकरी ने फोन पर जोशी से बातचीत की और उन्हें कहा कि जेपीसी की मांग पर समूचा विपक्ष एकजुट है और उनके रुख से विपक्षी ताकत कमजोर हो रही है। यहां तक कि सरकार भी उनके बयान को ढाल के रूप में उपयोग कर रही है।

सूत्रों का कहना है कि इसके बाद भी जोशी अपनी बात पर अड़े रहे कि उन्होंने कभी भी जेपीसी मांग का विरोध नहीं किया है। इसके बाद जोशी ने गडकरी से बुधवार रात मुलाकात की। इस दौरान गडकरी ने उन्हें स्पष्ट कर दिया कि पार्टी में जेपीसी को लेकर राय स्पष्ट है। इसके बाद ही जोशी बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करने को राजी हुए।

उल्लेखनीय है कि जोशी की ओर से दी गई सफाई भाजपा के मंच से सार्वजनिक की गई जबकि जोशी ने पिछले दिनों जो संवाददाता सम्मेलन बुलाया था उसकी जानकारी पीएसी की ओर से दी गई थी।

जोशी ने अपनी सफाई में कहा, "पीएसी अध्यक्ष होने के नाते मैं मानता हूं कि समिति को सरकार द्वारा खर्च किए जाने वाले जनता के पैसे का हिसाब करने और व्यापक जवाबदेही तय करने के विस्तृत अधिकार प्राप्त हैं और मैं इस भूमिका को निभाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हूं।"

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पीएसी के अध्यक्ष की भूमिका में सामंजस्य लाने की कोशिश में जोशी ने कहा, "भारतीय जनता पार्टी का सदस्य होने के नाते मैं भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए पार्टी की जेपीसी गठित किए जाने की मांग का पूरा समर्थन करता हूं।"

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पीएसी के समक्ष उपस्थित होने की पेशकश के बाद जोशी के रुख से पार्टी खुश नहीं थी।

अपने बयान में जोशी ने 'भ्रष्टाचार के मुद्दों' पर चिंता जताई और जोर देकर कहा कि 'पीएसी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के आधार पर सरकारी खर्च के मामलों' को देखेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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