सिटी बैंक धोखाधड़ी : पुरी को 7 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा
गुड़गांव, 30 दिसम्बर (आईएएनएस)। निवेशकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोपी सिटी बैंक के प्रबंधक शिवराज पुरी ने गुड़गांव में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुरी को गुरुवार को सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। उस पर पहले 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया, लेकिन यह राशि उससे तीन गुनी 300 करोड़ रुपये है।
गुड़गांव पुलिस आयुक्त एस. एस. देशवाल ने पत्रकारों को बताया, "पुरी ने रात 12:30 बजे आत्मसमर्पण किया। न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।" उन्होंने कहा कि पुरी से पूछताछ के बाद कुछ और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
आरोपी को गुड़गांव के एक विशेष न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे एक सप्ताह की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट राज कुमार यादव ने आरोपी को छह जनवरी को दोबारा पेश करने के लिए पुलिस को निर्देश दिया।
देशवाल ने बताया, "सभी खातों को जब्त करने के लिए बैंकों को नोटिस जारी किया गया है। हमने मामले की जांच के लिए पांच विशेष दल का गठन किया है और हम पुरी की सुनवाई में जुटे हैं।"
पुलिस के मुताबिक दिल्ली स्थित हीरो समूह ने पुरी के खाते में 200 करोड़ रुपये निवेश किए थे और 100 करोड़ रुपये अन्य व्यक्तिगत खाता धारकों ने जमा किए थे। पुरी ने इन पैसों को रेलिगेयर, ओकाया और बोनांजा सहित पांच प्रमुख ब्रोकरेज कम्पनियों में निवेश किया था।
उन्होंने बताया कि करीब 81 खातों के बारे में पता लगाने के लिए लगभग 40 टीमें बनाई गई हैं। आरोपी ने इन खातों में कथित रूप से धोखाधड़ी की राशि जमा किया है। पुलिस आरोपी के पिता के कथित स्वामित्व वाली एक ब्रोकरेज कम्पनी नॉरवे मार्टिन के बारे में भी जांच कर रही है।
पुलिस ने बताया कि पुरी ने कथित रूप से भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निवेशकों को ज्यादा मुनाफा देने वाली फर्जी योजनाओं में पैसा लगाने के लिए आकर्षित किया। इसके लिए उसने सिटी बैंक में अपने पद का उपयोग किया।
सेबी ने पुरी द्वारा बताई गई योजनाओं की उपलब्धता से इंकार किया है।
बैंक के रिलेशनशिप प्रबंधक पुरी पर आरोप है कि उसने निवेशकों को पैसा दोगुना करके देने का वादा करके धोखाधड़ी की थी। नए बैंक खाते खोलने का काम मिलने के बाद से पुरी ने बैंक की जानकारी के बिना कई ग्राहकों को ठगा।
बैंक के लिए नए खाते खोलने की जिम्मेदारी पुरी को दी गई थी। जिसका फायदा उठाते हुए उसने लोगों को ठगा। पुलिस और बैंक के सूत्रों ने बुधवार को धोखाधड़ी की कुल राशि 200 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया था जो कि मंगलवार को पुलिस द्वारा बताए गए 100 करोड़ रुपये के अनुमान से ज्यादा है।
मंगलवार को यह मामला सामने आने के बाद से वह फरार था।
करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी उजागर होने पर केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने गुरुवार को इसे 'व्यक्ति की निजी करतूत' करार दिया। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि यह व्यवस्था की खामी नहीं है। लोगों का धन बैंकों में सुरक्षित है।
मुखर्जी ने बुधवार को नार्थ ब्लॉक कार्यालय के बाहर पत्रकारों को बताया, "बैंकों के लिए नियमित रूप से नियम हैं और अन्य सभी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।"
सिटी बैंक के आरोपी अधिकारी के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने कहा, "यदि किसी व्यक्ति ने निजी तौर पर धोखाधड़ी की है तो उस पर कानून के हिसाब से कार्रवाई होगी।"
सिटी बैंक ने भी कहा कि वह धोखाधड़ी की जांच कर रहा है। साथ ही उसने उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया कि उनका धन सुरक्षित है।
बैंक ने अपने एक बयान में कहा, "संदिग्ध लेन देन पर रोक लगा दी गई है। बैंक जांच में अधिकारियों का पूरा सहयोग कर रहा है। इस धोखाधड़ी से बैंक के अन्य खातों, लेन देन अथवा बैंक के उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं होगा।"
उल्लेखनीय है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 29 नवंबर को जारी अपने एक परिपत्र में लोगों से अधिक ब्याज दर देने वाली बैंकों की योजनाओं पर अतिरिक्त सावधानी बरतने के लिए कहा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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