राजनीतिक कारणों से गोडसे को संघ से जोड़ती है कांग्रेस : आरएसएस
दो भागों में प्रकाशित एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी द्वारा संपादित पुस्तक 'कांग्रेस एंड द मेकिंग ऑफ द इंडियन नेशन' के अध्याय 'नेहरू युग' में कहा गया है कि नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर गांधी की हत्या की थी, वह हिंदू महासभा और आरएएसएस का सदस्य था।
आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी राम माधव ने गुरुवार को आईएएनएस से कहा कि कांग्रेस ने पुस्तक में मजह अपने हृदय को टटोला है, उसे महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े तथ्यों के बारे में भी ऐसा करना चाहिए था।
माधव ने कहा, "यह बहुत पुरानी शरारत है, जिसे कांग्रेस मन में रखे हुए है। यह झूठ है, जिसे उसने अपना राजनीतिक हित साधने के लिए वर्षो से बनाए रखा है।"
माधव ने कहा कि गोडसे ने 1930 के मध्य में आरएसएस छोड़ दिया था। उन्होंने कहा, "इसलिए यह कहना कि गोडसे आरएसएस के सदस्य थे, सिर्फ राजनीतिक इरादे से एक झूठ को उछालना है।" उन्होंने यह भी कहा कि सोच-समझकर संघ को बदनाम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह साबित करने के लिए अदालत का फैसला ही काफी है, जिसमें कहा गया है कि 'गांधीजी की हत्या में आरएसएस का हाथ नहीं है।'
यह पूछे जाने पर कि क्या आरएसएस इस मुद्दे पर कोई कानूनी कदम उठाएगी, माधव ने कहा कि वह वचन नहीं दे सकते।
उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह के यह बयान देने पर कि 'महात्मा गांधी की हत्या आरएसएस की एकमात्र उपलब्धि' है, आरएसएस एक मुकदमा दायर कर चुका है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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