उल्फा अध्यक्ष जमानत पर रिहा
सरकारी वकील द्वारा आपत्ति नहीं जताने के बाद विशेष टाडा अदालत ने गुरुवार को उसे जमानत दे दी।
उल्फा अध्यक्ष के वकील ने आईएएनएस से कहा कि अदालत ने 54 वर्षीय राजखोवा को बिना अनुमति असम या देश से बाहर जाने से मना किया है।
एक-दो दिनों में कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद राजखोवा को रिहा कर दिया जाएगा।
राजखोवा के साथ उनकी पत्नी कावेरी और दो बच्चों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में उन पर बिना कोई अभियोग लगाए उन्हें मुक्त कर दिया गया था। उसके बाद से राजखोवा का परिवार पूर्वी असम के सिवसागर जिले के लकवा स्थित अपने पैतृक घर में रह रहा है।
असम पुलिस ने बताया कि राजखोवा ने 12वीं तक की शिक्षा हासिल की है। उस पर हत्या, अपहरण, फिरौती, आदि कई आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने का अरोप है। इनमें उसे अधिकतम मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है।
सरकार उल्फा नेताओं को मुक्त कर शांति वार्ता चाहती है। इसलिए राजखोवा का मुक्त होना संभव हो पाया।
मई के बाद राजखोवा के अलावा उल्फा के अन्य पांच नेताओं को भी छोड़ा जा चुका है। उन्होंने सरकार से शांति वार्ता शुरू करने का वादा किया है। उल्लेखनीय है कि उल्फा के मुख्य कमांडर परेश बरुआ को छोड़कर सभी प्रमुख नेता गिरफ्तार थे।
मई के बाद छोड़े गए छह नेताओं में सबसे पहले प्रदीप गोगोई और मिथिंगा डेमरी, उसके बाद राजू बरुआ और प्रणति डेका और उसके बाद इस माह के शुरू में भीमकांता बुरागोहेन को जमानत पर रिहा किया गया था।
उल्फा के अध्यक्ष से उम्मीद की जा रही है कि वह असम में 30 सालों से जारी अस्थिरता को समाप्त करने की कोशिश करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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