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कूड़े के ढेर से चलती ज़िंदगी

By Staff
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कूड़े के ढेर से चलती ज़िंदगी
बिगड़ते आर्थिक हालात के शिकार ग़रीब आप्रवासी लोग भी हैंग्रीस में बिगड़ते आर्थिक हालात ने कई लोगों की ज़िंदगी बदल कर रख दी है. कभी नौकरीशुदा रहे या अपना व्यवसाय चलाने वाले लोग अब गुज़र बसर करने के लिए कूड़े के ढेर से सामान उठाकर उन्हें बेचते हैं और इस तरह उनकी रोज़ी रोटी चलती है.सुबह सूरज निकलने से घंटों पहले ये लोग टॉर्च की रोशनी में कूड़े के ढेर से दूसरों का फेंका सामान उठाने आते हैं.ये नज़ारा है एथेंस शहर में केरामिकॉस के पास का जहाँ पुराने ज़माने में लोगों को दफ़नाया जाता है.

किसी दौर में ये इलाक़ा पुरातन काल का सामान ख़रीदने का शौक रखने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र हुआ करता था. लेकिन अब ये ऐसे लोगों का अड्डा बन गया है जो आर्थिक हालात के मारे हुए हैं.कूड़े वगैरह से उठाया सामान लोग अपनों घरों में साफ़-सुथरा कर यहाँ बने बाज़ार में बेचने आते हैं.कभी पेशे से बिल्डर रहे एन्टॉनिस सिफ़ोनियोस अब कूड़ेदानों से उठाए जूते, कंबल और अन्य सामान बेचते हैं.

वे कहते हैं कि उनकी नौकरी चली गई क्योंकि मालिकों ने अवैध रूप से आए ऐसे आप्रवासियों को काम पर रख लिया जो कम पैसे पर काम करने को तैयार थे.लेकिन एन्टॉनिस का सामान कोई ख़रीदना नहीं चाहता. वे कहते हैं, “स्थिति बहुत ख़राब है. किसी के पास नौकरी नहीं है, न ही पैसा है. हालात और भी बिगड़ने वाले हैं."

न नौकरी है न पैसे

सैंथी ग्रीस उन लोगों में शामिल हैं जो तार-तार होती ज़िंदगी के बीच भी जीने की कोशिश कर रही हैं. उनके परिवार की कंपनी थी जहाँ सिलाई का काम होता था लेकिन व्यवसाय आर्थिक हालात की भेंट चढ़ गया.अब वे कुछ किताबें और तीन पुरानी सिलाई की मशीनें बेचकर अपनी कंपनी का कर्ज़ उतराने के लिए संघर्ष कर रही हैं.इसी तरह पेट्रेऑस भी इधर-उधर से सामान उठाते हैं, उसे घर जाकर धोते हैं और फिर ठीक-ठाक दाम पर बाज़ार में बेचने की कोशिश करते हैं.

कचरे से उठाया सामान बेचने वाले लोगों के स्टॉल पर वही लोग ख़रीददारी करने आते हैं जो ग़रीब आप्रवासी हैं और यूरोप के दूसरे देशों में जाने की फ़िराक़ में हैं पर ग्रीस में फँस कर रह गए हैं.ग्रीस में वर्ष 2010 में आर्थिक उथल पुथल मची रही. ऋण संकट से जूझ रहे ग्रीस को बचाने के लिए 110 अरब अमरीकी डॉलर का अंतरराष्ट्रीय राहत कोष बनाना पड़ा है. विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीस में स्थिति सुधरने से पहले और बिगड़ेगी.

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