'राजद्रोह मुकदमे में चाहिए पुख्ता सबूत'
पूर्व सीजेआई वी.एन. खरे ने एक टेलीविजन चैनल से कहा, "राज्य को यह साबित करना होगा कि व्यक्ति दोषी है। यदि दोष साबित करने में थोड़ी भी कमी रही तो व्यक्ति को दोषी करार नहीं दिया जा सकता।"
ज्ञात हो कि गत 24 दिसम्बर को छत्तीसगढ़ की एक अदालत ने सेन (59) को आजीवन करावास की सजा सुनाई।
सेन को वर्ष 2007 में नक्सली विचारक नारायण सान्याल के साथ कथित सम्बंध के आरोप में बिलासपर से गिरफ्तार किया गया, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें मई 2009 में जमानत पर रिहा कर दिया।
पूर्व सीजेआई ए.एच. अहमदी ने भी खरे के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि राजद्रोह के मामले में आरोपी के खिलाफ अत्यंत पुख्ता साक्ष्यों की जरूरत होती है।
उन्होंने कहा, "सेन पर लगा अभियोग काफी गंभीर है और इसके लिए दी गई सजा भी काफी कठोर है। आरोपी के खिलाफ सबूत को अत्यंत ठोस होना होगा। यदि सबूत कमजोर है तो मुझे नहीं लगता कि अदालत सजा को जारी रखेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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