पंजाब सूचना आयोग के गलत निर्णयों का अनूठा विरोध

अल्केश शर्मा

चण्डीगढ़, 29 दिसम्बर (आईएएनएस)। पंजाब सूचना आयोग की कार्यपद्धति से खिन्न सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून से जुड़े यहां के कार्यकर्ताओं ने सूचना आयुक्त के विरोध का अनूठा तरीका ढूढ़ निकाला है।

कार्यकर्ता आयोग के हास्यास्पद निर्णयों पर एक पुस्तक प्रकाशित कर उसे राज्य के राज्यपाल और देश भर में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को भेट करेंगे। पुस्तक में आयोग द्वारा लिए गए सौ हास्यास्पद निर्णय शामिल हैं। मुख्य सूचना आयुक्त ने हालांकि इन आरोपों को खारिज कर दिया है।

पंजाब आरटीआई कार्यकर्ता परिसंघ ने राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त आर.आई.सिंह पर आरोप लगाया है कि वह सरकारी अधिकारियों के गलत कामों के बारे में जानकारी मुहैया नहीं कराते और इस तरह से वे उनका पक्ष लेते हैं।

परिसंघ के अध्यक्ष एच.सी.अरोड़ा ने आईएएनएस को बताया, "हमने लिखित आवेदन, ज्ञापन देने के अलावा सूचना आयुक्त कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किए, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला।"

अरोड़ा ने कहा, "हमारे पास सबूतों के साथ सौ ऐसे मामले हैं, जिनमें आयोग ने अनुचित निर्णय लिए हैं।"

अरोड़ा ने कहा, "ऐसे कई मामले हैं जिनमें आयोग ने अनुचित कारणों को बता कर जानकारी मुहैया कराने से सीधे इंकार कर दिया है। इसलिए हमने एक किताब प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। पुस्तक का शीर्षक होगा 'पंजाब सूचना आयोग के 100 हास्यास्पद निर्णय'।"

अरोड़ा ने कहा कि यह पुस्तक पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटील और देश के सभी उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को भेजा जाएगा।

अरोड़ा ने बताया, "यह किताब जनवरी 2011 के अंत तक प्रकाशित हो जाएगी। हम इसे पंजाब के राज्यपाल और सभी सूचना आयुक्तों के साथ ही देश भर के उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को भेट करेंगे।"

आरटीआई कार्यकर्ता परिसंघ ने यह भी आग्रह किया है कि समाज के विभिन्न तबकों के योग्य व अच्छे रिकार्ड वालों को ही राज्य में सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त किया जाए।

अरोड़ा ने कहा, "सेवानिवृत्त आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) और पुलिस अधिकारियों को सूचना आयुक्त के रूप में नहीं नियुक्त किया जाना चाहिए।"

राज्य में आरटीआई कार्यकर्ता परिसंघ की स्थापना जून 2009 में की गई थी। राज्य भर में इसके 900 सदस्य हैं।

लेकिन पंजाब के मुख्य सूचना आयुक्त ने इन आरोपों से इंकार किया है। सूचना आयुक्त सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। वह पंजाब के मुख्य सचिव के पद पर काम कर चुके हैं और भारत सरकार में सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।

सिंह ने कहा, "इस विरोध प्रदर्शन के पीछे का कारण मेरे समझ में नहीं आता। मैं अपने कार्यालय में हमेशा उपलब्ध हूं। कोई भी व्यक्ति किसी भी समय मुझसे मुलाकात कर सकता है। यदि उन्हें कोई समस्या है, तो वे मुझसे बात कर सकते हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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