बिनायक सेन को बचाने बुद्धिजीवी आगे आए
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली विश्वविद्यालय, जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलंबिया विश्वविद्यालय, मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान एवं अमेरिका के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान एवं कोलकाता के भारतीय प्रबंधन संस्थान के प्राध्यापकों सहित अन्य संस्थानों के शिक्षाविदों ने साझा बयान पर हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर करने वालों में कई लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हैं।
बयान में कहा गया है, "चिकित्सक बिनायक सेन ने कभी किसी व्यक्ति पर हिंसक प्रहार नहीं किया और न ही किसी को हिंसा का सहारा लेने के लिए उकसाया, कभी भी देश के संवैधानिक आदेश के विरुद्ध किसी षड्यंत्र में शामिल हुए और किसी षड्यंत्रकारी संगठन की नियमित सेवा में रहे।" बयान के मुताबिक "उन्हें सुनाई गई सजा क्रूरता है और विश्वास के लायक नहीं है। संवैधानिक आदेश के परिरक्षण के नाम पर की गई इस तरह की कार्रवाई संवैधानिक आदेश का स्वयं अवमूल्यन करना है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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