कपार्ट भूमिका न बदले तो समाप्त हो जाएगा : जोशी (लीड-1)
जोशी ने देशभर में विकास परियोजनाओं पर काम कर रही करीब 12,000 सामाजिक संस्थाओं को सहयोग करने वाले कपार्ट के सांगठनिक ढांचे में बड़े बदलाव करने की जरूरत बताई।
जोशी ने ग्रामीण विकास के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन भाषण में कहा कि आम लोगों को जीविका के विभिन्न अवसरों से अवगत कराने में कपार्ट की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक स्तर पर काम करने वाली संस्थाओं को प्रौद्योगिकी सहायता उपलब्ध न कराया जाए, तो सामाजिक विषमता बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि कपार्ट को इन संस्थाओं को प्रौद्योगिकी सहायता उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि फंड की कोई कमी नहीं है। साथ ही कहा कि देश के 2.44 लाख पंचायतों को कृषि, विपणन नेटवर्क, आदि क्षेत्रों में विशेषज्ञों की सहायता की जरूरत है।
सरकार पंचायतों को स्वशासन का मॉडल बनाना चाहती है और सबसे बड़ी समस्या आम लोगों के लिए जीविका के अवसर बढ़ाने की है। अगर निचले स्तर पर काम करने वाले संगठनों को प्रौद्योगिकी सहायता उपलब्ध न कराया जाए, तो सामाजिक विषमता बढ़ेगी।
उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं के साथ जुड़े लोगों में ज्ञान की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि ग्राम सेवकों को आमतौर पर फसल का उत्पादन बढ़ाने का तरीका या पेटेंट के बारे में पता नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि कपार्ट सरकार की महात्वाकांक्षी परियोजनाओं जैसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, आदि के साथ जमीनी स्तर पर प्रौद्योगिकी का प्रसार करने में मदद कर सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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