कराची में अनूठा शक्ति प्रदर्शन!

इस अनोखी प्रतियोगिता को यहां 'गुट्टी' कहते हैं। हजारा समुदाय की सालों पुरानी परम्पराओं में उसकी उत्पत्ति हुई थी। बीते समय में वधू पक्ष का कोई व्यक्ति 80 किलोग्राम वजन का पत्थर पटकता था और वर पक्ष की ओर से किसी के इस पत्थर को उठाने की चुनौती स्वीकारने का इंतजार करता था।

समाचार पत्र 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के मुताबिक पत्थर-उठाने की इस प्रतियोगिता के आयोजनकर्ता मुनीर अब्बासी ने बताया कि यदि वर पक्ष पत्थर उठाने में असफल रहता था तो कभी-कभी शादी कई दिन के लिए टल जाती थी।

यह प्रतियोगिता हजारा समुदाय के युवाओं के लिए होती है।

'गुट्टी' एक चार दिवसीय आयोजन है जिसमें भारोत्तोलन के लिए 80 से 120 किलोग्राम के पत्थर रखे जाते हैं। वैसे प्रतियोगिता में शामिल होने वालों के लिए कोई आयु सीमा तय नहीं है लेकिन इसमें ज्यादातर 18 से 23 वर्ष उम्र के पुरुष हिस्सा लेते हैं।

अब्बासी ने बताया कि जो पुरुष अच्छा अभ्यास करते हैं केवल वे ही इस प्रतियोगिता में शामिल हो सकते हैं क्योंकि सूचना क्रांति के इस युग में उनके असफल रहने की खबर तेजी से फैलती है। प्रतियोगिता में किसी पुरुष की असफलता को उसके पुरुषार्थ के अपमान के रूप में देखा जाता है।

यहां सोमवार को हुई इस प्रतियोगिता में 18 वर्षीय नवीद खान विजयी रहे। खान बताते हैं कि वह पिछले तीन सालों से इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं। बाईस वर्षीय गुलाम मुस्तफा दूसरे व 24 वर्षीय जफर इकबाल तीसरे स्थान पर रहे।

सभी विजेताओं ने 85 से 95 किलोग्राम वजन तक का भार उठाया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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