'संवेदनहीन, भ्रष्ट है झारखण्ड पुलिस'

रांची, 28 दिसम्बर (आईएएनएस)। झारखण्ड महिला आयोग ने राज्य पुलिस पर महिला प्रताड़ना सम्बंधी मामलों के निपटारे के प्रति संवेदनहीन और भ्रष्ट होने का आरोप लगाया है। आयोग का कहना है कि यहां इस तरह के मामलों को दर्ज करने और संदिग्धों की गिरफ्तारी में बेवजह देरी होती है।

आयोग की सदस्य वासवी ने मंगलवार को आईएएनएस से कहा, "महिलाओं से सम्बंधित मामलों से निपटते समय झारखण्ड पुलिस संवेदनहीन, उदासीन और भ्रष्ट हो जाती है। वह महिला प्रताड़ना सम्बंधी मामलों में मुश्किल से ही प्राथमिकी दर्ज करती है। वे ऐसा तभी करते हैं जब इस तरह का मुद्दा उच्च स्तर पर ले जाया जाता है।"

उन्होंने कहा कि आयोग के पास ऐसी कई शिकायतें आई हैं, जिनमें महिलाओं ने पुलिस के प्राथमिकी दर्ज किए जाने से इंकार करने की बात कही है। वासवी ने जोर देते हुए कहा, "हमें ये शिकायतें भी मिली हैं कि पुलिस अधिकारी रिपोर्ट दर्ज करने के लिए पैसे की मांग करते हैं।"

राज्य पुलिस पर ये आरोप उस वक्त लगे हैं जब झारखण्ड में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले बढ़ रहे हैं।

आयोग के मुताबिक जमशेदपुर के पोटका पुलिस थाने के तहत आने वाले बाराटुडी गांव की निवासी रेवती रमन तब तक न्याय पाने में असफल रही जब तक कि कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म करने वाले आदमी ने उसे आग के हवाले न कर दिया।

रेवती को चार दिसम्बर को उस आदमी ने जला दिया जिसने कुछ महीने पहले उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया था। जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेडीकल कॉलेज एवं अस्पताल में 17 दिसम्बर को रेवती की मौत हो गई।

वासवी कहती हैं कि रेवती ने निकुंज मंडल के खिलाफ पोटका पुलिस थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था लेकिन आरोपी को तब तक गिरफ्तार नहीं किया गया जब तक कि उसने उसे आग के हवाले न कर दिया।

वासवी ने बताया कि रविवार को पुलिस को जमशेदपुर के नजदीक मांगो पुलिस थाना क्षेत्र से एक महिला का शव मिला था। पुलिस ने दुष्कर्म व हत्या का मामला होने का संदेह जताया लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

इसी तरह जमशेदपुर की भूयादिह कालोनी की कक्षा 10वीं की छात्रा दीपिका कुमारी ने 16 दिसम्बर को आत्महत्या कर ली थी। इलाके के दो लड़कों की छेड़छाड़ और भद्दी टिप्पणियों से तंग आकर उसने यह कदम उठाया।

ये तीनों घटनाएं जमशेदपुर में 25 दिन के अंदर हुईं और यह मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का गृह नगर है।

वासवी कहती हैं कि आयोग अकेले इन स्थितियों से निपटने में असहाय महसूस कर रहा है जबकि मुख्यमंत्री सिर्फ इतना कह रहे हैं कि प्रशासन मामलों को देखेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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