रंगमंच कलाकार रामप्रसाद बनिक का निधन
बनिक के परिजनों ने मंगलवार को बताया कि रामप्रसाद (55) को गत 25 दिसम्बर को अस्पताल में भर्ती किया गया। सोमवार रात करीब 11.50 बजे उनका निधन हुआ। बनिक अपने परिवार में पत्नी और दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं।
रंगमंच, अभिनय और निर्देशन में समान अधिकार रखने वाले बनिक करीब 50 वर्षो तक बांग्ला रंगमंच से जुड़े रहे। उन्होंने बांग्ला रंगमंच में चर्चित शंभू मित्रा के समूह 'बहुरूपी' से एक बाल कलाकार के रूप में अपने अभिनय की शुरुआत की।
बनिक ने मित्रा के संरक्षण में 'पुतुल खेला' 'दशचक्र' 'चेरा तर' 'चार अध्याय' और 'रक्तकरबी' नाटकों में काम किया। नाटक 'जदी अरेकबार' में इनके अभिनय को काफी सराहा गया।
बनिक वर्ष 1981 में 'बहुरूपी' से अलग हो गए और अपना रंगमंच समूह 'चेना मुख' निर्मित किया। बनिक के निर्देशन में इस समूह ने 'पाखी', 'रानी कहानी' और 'आगंतुक' जैसे शानदार नाटक दिए।
इसके बाद बनिक ने वर्ष 1991 में एक अन्य 'ग्रुप थियेटर पैसन' का गठन किया। इस समूह के तहत उन्होंने 'त्राता', 'टेम्पेस्ट' और 'अनुकूल' नाटकों का निर्देशन किया। इन नाटकों के मंचन से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बनिक को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति दी गई। इसके अलावा 'ऑल इंडिया क्रिटिक सर्किल' और पश्चिम बंग नाट्य अकादमी की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया।
बनिक ने अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में अपने नाटकों का मंचन किया। बनिक ने रंगमंच के अलावा कई फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों में काम किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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